सप्त चिरंजीवी में से एक श्री हनुमान जी की भक्ति कलयुग में तमाम दुखों को दूर करने वाली है। सनातन परंपरा में हनुमत भक्ति के बारे में मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा भाव से हनुमत स्तवन करता है, देवाधिदेव श्री बजरंग बली उसे अपनी उपस्थिति का अहसास जरूर कराते हैं। यही कारण है कि देश में शायद ही ऐसा कोई कोना हो जहां श्री हनुमान जी का पावन धाम न मौजूद हो, तो आइए श्री हनुमान जी की अद्भुत शक्ति् और भक्ति से जुड़े उन 10 पावन धाम के बारे में जानते हैं जिनके दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर और मनोकामनाएं पूरी होने लगती हैं —
हनुमान जयंती 2018 : बजरंगी के 10 पावन धाम, जिनके दर्शन से बनने लगते हैं बिगड़े काम
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जहां पत्नी के साथ मौजूद हैं हनुमत
भले ही उत्तर भारत समेत दुनिया भर में हनुमान जी की साधना-अराधना एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में की जाती हो लेकिन तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना पूजा जाता है। हैदराबाद से 220 कि.मी की दूर खम्मम जिला में हनुमानजी और उनकी पत्नी का मंदिर है। इस पावन धाम में बजरंग बली और उनकी पत्नी सुवर्चला की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन से वैवाहिक जीवन मे आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
जहां नारी स्वरूप में मौजूद हैं हनुमान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से 25 कि. मी. दूर पर स्थित है बजरंगी का यह पावन धाम। रतनपुर नाम के इस स्थान को महामाया नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि विश्व में हनुमान जी का यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां हनुमान नारी स्वरूप में मौजूद हैं।
उलटे हनुमान का मंदिर
देश की प्राचीन सप्तपुरियों में से एक मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी से महज 30 किमी की दूरी पर श्री हनुमान जी की उल्टे रूप में साधना-अराधना होती है। मंदिर में भगवान हनुमान की उलटे मुख वाली सिंदूर से सजी मूर्ति विराजमान है। रामायणकालीन यह मंदिर साँवरे नामक स्थान पर स्थापित है।
प्रयाग के लेटे हनुमान
उत्तर प्रदेश के इलाहबाद में संगम तट पर स्थित है हनुमान जी की यह लेटी हुई प्रतिमा। 20 फीट लम्बी इस प्रतिमा को हर साल गंगा जी स्नान कराने के लिए आती हैं। देश—दुनिया में जहां नदियों के जलस्तर को एक संकट के रूप में देखा जाता है, वहीं इस मंदिर के भक्त गंगा के जलस्तर को शुभता की दृष्टि से देखते हैं। मान्यता है कि जिस साल गंगा जी हनुमान जी को स्नान करने में असमर्थ रहती है तो वह उसकी भरपाई अगले वर्ष उन्हें कई बार स्नान कराकर करती हैं।