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जानें कैसे ग्रहों के अस्त होते ही अचानक से जिंदगी पड़ जाती है पस्त

Tue, 02 Oct 2018 11:22 AM IST
-डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक
-डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक Updated Tue, 02 Oct 2018 11:22 AM IST
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how the ast grah planets affect our life know by Astrologer Vinay Bajrangi
ast grah

यदि किसी जातक की कुंडली में कोई ग्रह सूर्य ग्रह के समीप जाकर अस्त होता है तो वह बलहीन हो जाता है। किसी भी ग्रह के अस्त होने पर उनका प्रभाव उनका बल उनकी सभी शक्ति क्षीण हो जाती है फिर चाहे वह किसी मूल त्रिकोण या उच्च राशि में ही क्यों न हों वह अच्छे परिणाम देने में असमर्थ हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार एक अस्त ग्रह एक बलहीन व अस्वस्थ राजा के सामान होता है। कोई भी अस्त ग्रह अपने साथ-साथ जिस भाव में वह उपस्थित है उसके भी फलों में विलम्ब उत्पन्न करता है। मसलन, यदि किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति ग्रह अस्त हो जाता है और वह सप्तम भाव में स्थित हो तो वह न केवल स्त्री सुख में बाधा बल्कि जातक की विवेकशीलता में भी कमी उत्पन्न करता है। अस्त ग्रह दुष्फल तो देते ही हैं लेकिन त्रिक भावों में उनके अशुभ फलों की अधिकता और भी बढ़ जाती है। अस्त ग्रह किसी नीच की राशि, दूषित स्थान, शत्रु राशि या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो उसका परिणाम और भी हानिकारक हो जाता है। इसलिए किसी भी कुंडली के विश्लेषण में अस्त ग्रह का विश्लेषण कर लेना आवश्यक होता है।

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नौ ग्रह

यदि जातक की कुंडली में कोई भी शुभ ग्रह जैसे बृहस्पति, शुक्र, चंद्र, बुध आदि अस्त हों तो और भी भयानक परिणाम हो सकते हैं। अस्त ग्रहों की दशा-अंतर्दशा की स्थिति में जातक को बीमारी, गंभीर दुर्घटना कोई भयानक दुःख आदि हो सकते हैं। कई कुंडलियों में तो देखने को मिलता है कि किसी एक ही शुभ ग्रह के अस्त होने पर जातक का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, ऐसी स्थिति में उसके साथ कुछ भी घटित हो सकता है जिसका परिणाम अत्यधिक दुखदायी हो जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु , दुर्घटना में कोई अंग-भंग होना, किसी भी योजना के असफल होने पर धन का अत्यधिक अभाव होना, पूर्वजों की संपत्ति का नष्ट होना आदि हो सकते हैं। यदि कोई ग्रह अस्त हो लेकिन शुभ स्थान पर स्थित हो और किसी शुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो उसके परिणामों में कुछ हद तक कमी आ सकती है, लेकिन यदि अस्त ग्रह किसी अशुभ ग्रह या दूषित ग्रह की छाया में हो तो परिणाम काफी दुष्कर हो सकते हैं।
अस्त ग्रहों के फल और उनकी दशा-अंतर्दशा के परिणाम जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —

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blood moon
चन्द्रमा
यदि जातक की जन्मकुंडली में चन्द्रमा अष्टमेश के पापों के प्रभाव में हो तो व्यक्ति दीर्घकाल तक अवसादग्रस्त रहता है और यदि द्वादशेश का प्रभाव हो तो जातक किसी लंबी बीमारी या नशे इत्यादि का शिकार हो जाता है। चन्द्रमा के अस्त होने पर जातक की मां का अस्वस्थ होना, पैतृक संपत्ति का नष्ट होना, मानसिक अशांति आदि घटनाएं घटित होती रहती हैं।
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mars

मंगल
मंगल के अस्त होने पर उसकी अंतर्दशा में जातक को नसों में दर्द , उच्च अवसाद, खून का दूषित होना आदि बीमारियां हो सकती हैं। अस्त मंगल ग्रह पर षष्ठेश के पाप का प्रभाव होने पर जातक को कैंसर, विवाद में हानि चोटग्रस्त आदि कष्ट होते हैं और यदि अष्टमेश के पाप का प्रभाव हो तो जातक भ्र्ष्टाचारी, घोटाले करने वाला बन जाता है। अस्त मंगल पर राहु-केतु का प्रभाव होना जातक को किसी मुकदमें आदि में फंसा सकता है।

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mercury

बुध
जातक की कुंडली में बुध अष्टमेश के पाप के प्रभाव में हो तो जातक को दमा, मानसिक अवसाद, किसी प्रिय की मृत्यु का दुःख आदि से गुजरना पड़ता है। अस्त बुध की अंतर्दशा में जातक को धोखे का शिकार होता है। जिससे वह तनावग्रस्त रहता है, मानसिक अशांति बनी रहती है तथा जातक को चर्म रोग आदि भी हो सकता है।

 

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