Kundli Milan: विवाह के लिए कई लोग लड़का और लड़की की जन्म पत्रिका मिलान करते हैं। इसमें अधिकतर ज्योतिष अष्टकूट मिलान करके निर्णय लेते हैं। इस अष्टकूट मिलान को मेलापक मिलान भी कहते हैं। इसे ही गुण मिलान कहते हैं। इसमें लड़के और लड़की के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है। कई ज्योतिष इस अष्टकूट मिलान को नहीं मानते हैं। कई बार 36 में से 25 से 30 गुण मिलने के बावजूद लड़का और लड़की में सामंजस्यता नहीं बैठ पाती है। इसलिए छोटी छोटी बातों पर ही झगड़े होते रहते हैं। इसलिए अष्टकूट मिलान के अलावा भी पत्रिका मिलान के लिए कुंडली में कुछ और भी बातों का अध्ययन करना जरूरी होता है, चलिए जानते हैं विस्तार से।
Kundli Milan: शादी के पहले इस तरह मिलाएं पत्रिका, नहीं होगी समस्याएं
Kundli Milan: कई बार 36 में से 25 से 30 गुण मिलने के बावजूद लड़का और लड़की में सामंजस्यता नहीं बैठ पाती है। इसलिए छोटी छोटी बातों पर ही झगड़े होते रहते हैं। इसलिए अष्टकूट मिलान के अलावा भी पत्रिका मिलान के लिए कुंडली में कुछ और भी बातों का अध्ययन करना जरूरी होता है, चलिए जानते हैं विस्तार से।
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अष्टकूट मिलान
अष्टकूट मिलान में अधिकतर ज्योतिष मानते हैं कि भकूट और नाड़ी मिलान करना जरूरी है। भकूट का संबंध जीवन और आयु से होता है। नाड़ी का संबंध वर और वधु दोनों की सामंजस्यता और संतान से है। कई ज्योतिष मानते हैं कि बाकि मिलान भले ही हो या न हो लेकिन भटूक और नाड़ी मिलान नहीं हो रहा है तो विवाह नहीं करना चाहिए। सुखी और पूर्ण वैवाहिक जीवन के लिए पति और पत्नी की नाड़ी अलग होनी चाहिए। हालांकि कई ज्योतिष मानते हैं कि 36 में से कम से कम 19 गुण तो मिलना ही चाहिए। कई ज्योतिष मानते हैं कि नाड़ी दोष और भटूक दोष का उपाय करने से कुछ नहीं होता है। इसलिए यदि मिलान नहीं हो रहा है तो विवाह न करें।
मंगल दोष
जिस भी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में है तो उस कुंडली को मांगलिक कुंडली माना जाता है, लेकिन यदि उस भाव या मंगल पर गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो मंगल दोष निरस्त हो जाता है। इसी के साथ ही यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है और कुंडली में उसी भाव में सामने शनि, बृहस्पति, राहु या केतु बैठे हों तो तो मांगलिक दोष अपने आप समाप्त हो जाता है।
यदि मांगलिक कुंडली में मंगल के साथ या मंगल पर शुभ ग्रहों की दृष्टि है या शुभ ग्रह केंद्र में हैं तो मांगलिक दोष नहीं लगता है। इस प्रकार से मंगल दोष निरस्त माने जाने की और भी कई स्थितियां बनती हैं। हालांकि अधिकतर ज्योतिष मानते हैं कि मंगल दोष तो अधिकतर कुंडली में होता है।
सिर्फ मंगल देखना सही नहीं है क्योंकि मंगल दोष तो कुछ लोग लग्न से बता देते हैं कुछ ज्योतिष चंद्र कुंडली से बता देते हैं और कुछ कारक यानी शुक्र से भी बता देते हैं। इस प्रकार से तो दुनिया की आधी आबादी को मंगल दोष निकल जाएगा। इसलिए इसे कुंडली मिलान का पूर्ण आधार नहीं मान सकते हैं। यदि अधिकतर लोग मंगल दोष के ही हैं तो फिर मंगल मिलाने की जरूरत नहीं।
ऐसे में कई ज्योतिष बोलने लगते हैं कि मंगल तीन प्रकार होता है- सौम्य मंगल, मध्यम मंगल और कड़क मंगल। कहते हैं कि सौम्य मंगल का कोई दोष नहीं, मध्यम मंगल 28 वर्ष की उम्र के बाद उसका दोष समाप्त हो जाता है। कड़क मंगल के दोष की शांति कराना चाहिए और इन्हीं लोगों को विवाह के संबंध में कुंडली मिलान करने की आवश्यकता बताई जाती है। हालांकि बहुत से ज्योतिष अब यह मानने लगे हैं कि अष्टकूट मिलान और मंगल मिलान से बात नहीं बनती है। संपूर्ण कुंडली का ही विश्लेषण जरूरी है।
लग्न, सप्तम और पंचम भाव
आजकल के कई ज्योतिषी मानते हैं कि अष्टकूट मिलान और मंगल दोष से ज्यादा जरूरी है लग्न, सप्तम और पंचम भाव का विश्लेषण करना। अष्टकूट मिलान तो सिर्फ चंद्रमा से देखते हैं जिसकी एक टेबल बनी हुई है। उससे कुछ नहीं होता। आप सिर्फ चंद्रमा के आधार पर तय नहीं कर सकते हैं कि कुंडली मिल रही है या नहीं, बाकी ग्रहों के प्रभाव को नकार नहीं सकते। इसी प्रकार से मंगल का दोष भी उतना मान्य नहीं है, क्योंकि अष्टकूट मिलान में और मंगल दोष के मिलान में राहु, केतु और शनि का दोष छोड़ दिया जाता है, जबकि इस तरह से कुंडली मिलान करना उचित नहीं है। इसीलिए कुंडली मिलान में सबसे जरूरी है लड़का और लड़की की कुंडली के लग्न, सप्तम और पंचम भाव का विश्लेषण करना, क्योंकि लग्न जहां आपके विवाह की इच्छा और व्यक्तित्व को दर्शाता है।