फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानिए कितना घातक होता है कालसर्प दोष, कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं?

Thu, 07 May 2020 12:31 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 07 May 2020 12:31 AM IST
विज्ञापन
know about kaal sarp dosh in kundali and its effects
कुंडली में कालसर्प दोष - फोटो : kundali

कुंडली में अक्सर जब हम काल सर्प दोष की बात करते हैं तो मन में एक तरह का भय उत्पन्न होने लगता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, हमारी कुंडली में 12 प्रकार के काल सर्प दोष बनते हैं और इन सभी में आवश्यक नहीं कि हर कालसर्प दोष आपके लिए घातक हो, कुछ कालसर्प दोष ऐसे होते हैं जिनसे जातकों को सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है। लेकिन यह राहु केतु की स्थिति पर भी निर्भर करता है। तो चलिए जानते हैं सबसे पहले कालसर्प दोष क्या होता है? यह कुंडली में कैसे बनता है?

know about kaal sarp dosh in kundali and its effects
काल सर्प - फोटो : social media

कालसर्प दोष क्या होता है?
जब कुंडली में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प दोष बनता है। कालसर्प दोष दो शब्दों को मिलाकर बना है। इसमें पहला शब्द है काल, यानि मृत्यु और दूसरा शब्द है - सर्प, जिसका तात्पर्य सांप से है। कुंडली में कालसर्प योग के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक कष्ट सहना पड़ता है। इसके साथ ही कई तरह की परेशानियां जातकों को सहना पड़ता है।

know about kaal sarp dosh in kundali and its effects
काल सर्प

काल सर्पयोग का प्रभाव कब होता है?
जब राहु की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा आती है। 
जब भी गोचर के दौरान राहु अशुभ चलता हो।
जब भी गोचर से कालसर्प योग की श्रृष्टि हो।

विज्ञापन
विज्ञापन
know about kaal sarp dosh in kundali and its effects
काल सर्प
कितना घातक होता है कालसर्प दोष
मानसिक एवं शारीरिक कष्ट सहन करना पड़ता है।
पैतृक संपत्ति का नष्ट हो जाती है।
भाई-बंधुओं से धोखा मिलने की संभावना रहती है।
संतान को किसी तरह का कष्ट होता है।
शत्रुओं से निरंतर भय बना रहता है।
बुरे स्वप्न एवं अनिद्रा रोग की समस्या का सामना करना पड़ता है।
कोर्ट कचहरी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
know about kaal sarp dosh in kundali and its effects
काल सर्प

कुंडली में 12 तरह के कालसर्प दोष (योग) और उनका प्रभाव

  1. अनंत कालसर्प योग- लग्न से सप्तम भाव तक बनने वाले इस योग के प्रभाव स्वरूप जातक मानसिक अशांति जीवन में अस्थिरता भारी संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
  2. कुलिक कालसर्प योग- द्वितीय से अष्टम स्थान तक पड़ने वाले इस योग के कारण जातक कटु भाषी होता है कहीं ना कहीं उसे पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है किंतु राहु बलवान हो तो आकस्मिक धन प्राप्ति के योग भी बनते हैं।
  3. वासुकी कालसर्प योग- यह योग तृतीय से नवम भाव के मध्य बनता है। जिसके प्रभाव स्वरूप भाई बहनों से मनमुटाव साहस पराक्रम में वृद्धि और कार्य व्यापार में बड़ी सफलता के लिए कठोर संघर्ष करना पड़ता है।
  4. शंखपाल कालसर्प योग- यह योग चतुर्थ से दशम भाव के मध्य निर्मित होता है। इसके प्रभाव से मानसिक अशांति एवं मित्रों तथा संबंधियों से धोखा मिलने का योग रहता है। शिक्षा प्रतियोगिता में कठोर संघर्ष करना पड़ता है।
  5. पद्म कालसर्प योग- पंचम से एकादश भाव में राहु केतु होने से यह योग बनता है इसके कारण संतान सुख में कमी और मित्रता संबंधियों से विश्वासघात की संभावना रहती है।
  6. महापदम कालसर्प योग- छठें से लेकर बारहवें भाव तक पड़ने वाले योग में जातक ऋण, रोग और शत्रुओं से परेशान रहता है। कार्यक्षेत्र में शत्रु हमेशा षड्यंत्र करने में लगे रहते हैं, उसे अपने ही लोग नीचा दिखाने में लगे रहते हैं।
  7. तक्षक कालसर्प योग- सप्तम से लग्न तक राहु-केतु के मध्य पड़ने वाले इस योग के प्रभाव स्वरूप जातक का दांपत्य जीवन कष्ट कारक करता है। स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  8. कर्कोटक कालसर्प योग- अष्टम भाव से द्वितीय भाव तक के योग में जातक आर्थिक हानि अधिकारियों से मनमुटाव एवं प्रेत बाधाओं का सामना करता है। उसके अपने ही लोग हमेशा षड्यंत्र करने में लगे रहते हैं।
  9. शंखनाद कालसर्प योग- यह योग नवम से तृतीय भाव तक निर्मित होता है। इस योग के प्रभावस्वरूप कार्य बाधा, अधिकारियों से मनमुटाव, कोर्ट कचहरी के मामलों में उलझाने एवं अधिकाधिक विदेश प्रवास और यात्राएं कराता है।
  10. पातक कालसर्प योग- दशम से चतुर्थ भाव तक बनने वाले इस योग में माता पिता के स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। नौकरी में स्थान परिवर्तन और अस्थिरता की अधिकता रहती है।
  11. विषधर कालसर्प योग- ग्यारहवें भाव से लेकर पंचम भाव तक के मध्य राहु-केतु के अंदर पड़ने वाले ग्रहों के द्वारा यह योग निर्मित होता है। इसमें नेत्र पीड़ा हृदय रोग और बड़े भाइयों से संबंध की दृष्टि से अच्छा नहीं कहा जा सकता।
  12. शेषनाग कालसर्प योग- द्वादश से लेकर छठे भावतक के मध्य पड़ने वाले इस योग के प्रभावस्वरूप जातक को नेत्र विकार और कोर्ट कचहरी के मामलों में चक्कर लगाने पड़ते हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed