देश के कई भागों में इन दिनों जन आंदोलन, हिंसा और उपद्रव मचा हुआ है। इसका कारण ज्योतिषशास्त्री शनि और मंगल को मान रहे हैं। ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा बता रहे हैं कि 20 फरवरी को मंगल ग्रह अपनी राशि वृश्चिक में आ पहुंचे हैं। इस राशि में पहले से ही शनि महाराज आसन जमाए हुए बैठे हैं। क्रूर और पाप ग्रह का यह मिलन देश दुनिया के लिए कई मायने में ठीक नहीं है।
बना है शनि-मंगल का खतरनाक योग, देश-दुनिया और राशि पर असर जानिए
मंगल वृश्चिक राशि में इस बार 6 महीनों तक रहेंगे। आमतौर पर मंगल ग्रह का एक राशि में भ्रमण-काल केवल 45 दिनों का होता हैl लेकिन ढाई वर्ष के बाद मंगल किसी राशि में वक्री होकर 6 महीनों तक भी रहते हैं। मंगल जब एक राशि में 6 महीनों तक रहते हैं तो वह समय हिंसा और उपद्रव के कारण आम जनता को तकलीफ देने वाला होता है।
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मेदिनी ज्योतिष के अनुसार यदि मंगल के एक राशि में 6 महीनों तक ठहरने के दौरान वह दुःख कारक ग्रह शनि से युति अथवा दृष्टि से संबंध स्थापित करें तो उस वर्ष युद्ध, अल्प-वर्षा, आकाल और भूकंप से जन-धन की हानि होती हैl शनि-मंगल की वृश्चिक में 20 फरवरी से 18 सितंबर तक रहने वाली यह युति पश्चिम दिशा में एक भयानक युद्ध का भी संकेत है।
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ज्योतिष के ग्रन्थ भविष्यफल भास्कर के अनुसार जब शनि वृश्चिक राशि में अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्रों में गोचर करता है तो पश्चिम दिशा में महा-भयंकर संग्राम होता है जिसमें राजाओं का पतन होता हैl कूर्म चक्र पद्धति के अनुसार उज्जैन को केंद्र मानने पर भारत की पश्चिमी सीमा यानि पाकिस्तान के बॉर्डर और भारत से पश्चिम में मध्य-एशिया में युद्ध के संकेत मिलते हैं।
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शनि-मंगल की इस युति के अतिरिक्त इस समय गोचर में गुरु और राहु की युति सिंह राशि में चल रही है। धर्म, धन-सम्पदा और नैतिक मूल्यों के कारक ग्रह गुरु वक्री हो कर राक्षस ग्रह राहु से युत हैंl इस युति को ज्योतिष में 'चांडाल-योग' कहते हैं, जो समाज में नैतिक मूल्यों के पतन और राजनीति में परम्पराओं और मर्यादाओं के छिन्न-भिन्न होने का योग है। गुरु और राहु की इस युति पर शनि की दृष्टि पड़ रही है जो कि आने वाले कुछ दिनों में वैश्विक महामंदी, राजनैतिक स्कैंडल और युद्ध-उन्माद से भारत सहित विश्व के कई देशों में अभुपूर्व उथलपुथल पैदा कर देगी।