जीवन में समस्याएं तो आती ही रहती हैं परंतु कई बार ये समस्याएं व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति के जीवन में ग्रहों की चाल का बहुत महत्व होता है। ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति के कारण व्यक्ति के जीवन में अच्छी या बुरी घटनाएं घटित होती हैं, लेकिन व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार भी जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भले ही कहा जाता है कि हर व्यक्ति का भाग्य उसके जन्म के साथ ही तय हो जाता है लेकिन यह भी एक सत्य है कि व्यक्ति अपने कर्मों के अनुसार अपने भाग्य का निर्माण स्वयं करता है। ज्योतिष के अनुसार कई ऐसी आदतें होती हैं जो आपके भाग्य को दुर्भाग्य में बदल सकती हैं, इसलिए इन आदतों से दूर रहना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कि किन वजहों से करना पड़ता है दुर्भाग्य का सामना और क्या हैं उपाय।
इन वजहों से आपका सौभाग्य भी बन जाता है दुर्भाग्य, जानें उपाय
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कहते हैं कि जैसी आपकी संगति होती है वैसा ही आपके ऊपर प्रभाव पड़ता है, लेकिन क्या आपको पता है कि जहां अच्छी संगति आपके भाग्य को संवार सकती है तो वहीं बुरी संगति के कारण आपके भाग्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में रहने पर व्यक्ति स्वयं भी गलत रास्ते पर चलने लगता है और गलत कार्य करने पर जीवन में सदैव समस्याएं बनी रहती हैं। ऐसे व्यक्तियों के कारण न केवल उनके बल्कि साथ में रहने वाले लोगों जैसे परिवार, मित्रों आदि के भाग्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जब एक स्त्री और पुरुष का विवाह होता है और वे वचनों के साथ बंध जाते हैं तब उनका भाग्य भी एक दूसरे से जुड़ जाता है, इसलिए यदि पति-पत्नी दोनों के कर्मों का प्रभाव एक दूसरे के भाग्य पर पड़ता है। जीवनसाथी की गलत संगति और बुरे कर्मों के कारण आपका भाग्य भी खराब होता है और जीवन में समस्याएं आने लगती हैं। यदि किसी कारण से आपके भाग्य पर बुरा असर पड़ रहा है जिसके कारण जीवन में समस्याएं आ रही हैं तो बुरी संगति का त्याग करने के साथ ही प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। अपने मन और आहार को सात्विक रखना चाहिए।
नकारात्मक सोच को कारण व्यक्ति को भाग्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि जैसे आपके मन में विचार होते हैं वैसी ही आपके जीवन में चीजें होती हैं। नकारात्मक सोच होने पर व्यक्ति कार्य को करने से पहले ही नकारात्मक भाव लाने लगता है, जिसके कारण वह सही तरह से कार्य नहीं कर पाता है और कार्य होने से पहले ही बगड़ने लगते हैं। नकारात्मक सोच के कारण जीवन भी नकारात्मकता से भर जाता है। यदि जीवन में सफल होना है तो अपनी सोच को सदैव सकारात्मक रखना चाहिए। यदि मन में नकारात्मक विचार बने रहते हैं तो इसके लिए हर एकादशी का व्रत करना चाहिए साथ ही नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। किसी योग्य ज्योतिष की सलाह से पुखराज धारण कर सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति किसी को धोखा देता है। किसी व्यक्ति के साथ अपने स्वार्थ को लिए छल-कपट करता है तो उसे अवश्य ही उसके बुरे परिणाम भोगने पड़ते हैं। किसी का भी विश्वास तोड़ना किसी के हक की चीज छीनना, अकारण ही किसी को नुकसान पहुंचाना इन सभी का कारण व्यक्ति स्वयं की ही भाग्य बिगाड़ता है। बुरे कर्म करने और दूसरों को परेशान करने से शनि दंड देते हैं और व्यक्ति को जीवन में कष्टों का सामना करना पड़ता है। जब किसी की कुंडली में राहु-केतु अशुभ होते हैं तब वह गलत संगति और बुरे कर्मों में लिप्त हो जाता है। जितना अधिक वह बुरे कर्म करता है उतनी ही अधिक उसे परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इन सबसे बचने के लिए व्यक्ति को स्वंय को बुरी संगति से दूर रखने के साथ ही प्रायश्चित करना चाहिए और नियमित रूप से गजेंद्र मोक्ष का पाठ करना चाहिए। शनि को शुभ करने के लिए किसी स्थान पर पीपल और बरगद लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए साथ ही प्रत्येक शनिवार को जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए।