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रास्ते में जलभराव, नाव बनी सहारा
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:40 PM IST
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नाव
- फोटो : अमर उजाला
अमृतपुर। तहसील अमृतपुर से पांच किमी दूर गंगा कटरी में बसे गांव मंझा की मड़ैया में आने-जाने के लिए केवल कच्चा मार्ग है। इन दिनों रास्ते में गंगा नदी के बाढ़ का पानी भर गया है। इससे तहसील, थाने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व लोहिया मुख्यालय आने पर नाव का सहारा लेना पड़ता है। रोजाना सैकड़ों ग्रामीणों को मजबूरन नाव में बैठकर आर-पार जाना पड़ता है।
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ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव मंझा की मड़ैया बेहद पिछड़ा है। यहां विकास कार्य कराना तो दूर आने-जाने के लिए करीब पांच किमी लंबा रोड कई सालों बाद भी पक्का नहीं बन सका है। काला सोता नाला पर बलीपट्टी राजीगांव या रतनपुर रमहुआ के पुल निर्माण कराने व रास्ता बनवाने की मांग बीते दो दशक से कर रहे हैं पर सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीण होरीलाल, नरवीर, जदुनाथ, सुरेश चंद्र, रामपाल, नरेश चंद्र, अवधू का कहना है कि भयंकर बाढ़ आने पर यदि कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे अस्पताल तक ले जाने में दिक्कत होती है। कई बार लोगों की बीमारी के चलते मौत तक हो जाती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सर्वे कराकर डामरीकृत रोड बनवाने की मांग की है। उधर तहसीलदार शेख आलमगीर का कहना है कि बाढ़ के समय रास्ता बंद होने पर तहसील प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था कराई जाती है। लोग अपनी निजी नाव से भी आते-जाते हैं। शासन स्तर पर रोड व पुल बनवाने के लिए लिखा-पढ़ी करेंगे।
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