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Updated Sat, 27 Jul 2013 01:44 PM IST
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अगर आम चुनाव अभी होते हैं, तो भाजपानीत एनडीए, सत्ताधारी यूपीए से
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आगे निकल जाएगा। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि नतीजे त्रिशंकु रहेंगे और
दोनों गठबंधन 273 के बहुमत से सौ सीटें पीछे रह जाएंगे।
सीएसडीएस की ओर से किए गए सीएनएन-आईबीएन-द हिंदू इलेक्शन ट्रैकर पोल के मुताबिक 200 से ज्यादा सीटें उन राजनीतिक दलों के खाते में जाएंगी, जो न यूपीए का हिस्सा हैं और न ही एनडीए के साथ हैं।
पीएम की रेस में राहुल से आगे निकले मोदी
सर्वे में कहा गया है कि भाजपा 2009 की तुलना में फायदे में रहते हुए 156 से 164 सीटें बटोरेगी, जबकि कांग्रेस को नुकसान होगा और वह केवल 131 से 139 सीटों तक सिमट जाएगी।
सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है कि दोनों बड़े गठबंधनों को 29-29 फीसदी वोट शेयर मिलेगा, लेकिन एनडीए 172 से 180 सीटों के साथ आगे निकल जाएगा, जबकि यूपीए के खाते में 149 से 153 सीटें आएंगी। दोनों के बीच करीब 22 सीटों का अंतर रहेगा।
हालांकि, इन आंकड़ों पर गौर करते वक्त इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि जिन 18 राज्यों में यह सर्वे किया गया, उनमें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम को छोड़कर पूर्वोत्तर और दिल्ली को छोड़कर दूसरे केंद्रशासित प्रदेश शामिल नहीं हैं।
इन सभी जगह कुल 32 लोकसभा सीट हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास फिलहाल 16 और भाजपा के पास 7 हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने हाल में झारखंड में जेएमएम से हाथ मिलाया है, जो बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी दोस्त खोज सकती है।
साथ ही अगर यूपीए सरकार मई 2014 में होने वाले चुनावों से पहले तेलंगाना राज्य का ऐलान करती है, तो आंध्र प्रदेश का चुनावी गणित बदल सकता है।
सीएसडीएस की ओर से किए गए सीएनएन-आईबीएन-द हिंदू इलेक्शन ट्रैकर पोल के मुताबिक 200 से ज्यादा सीटें उन राजनीतिक दलों के खाते में जाएंगी, जो न यूपीए का हिस्सा हैं और न ही एनडीए के साथ हैं।
पीएम की रेस में राहुल से आगे निकले मोदी
सर्वे में कहा गया है कि भाजपा 2009 की तुलना में फायदे में रहते हुए 156 से 164 सीटें बटोरेगी, जबकि कांग्रेस को नुकसान होगा और वह केवल 131 से 139 सीटों तक सिमट जाएगी।
सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है कि दोनों बड़े गठबंधनों को 29-29 फीसदी वोट शेयर मिलेगा, लेकिन एनडीए 172 से 180 सीटों के साथ आगे निकल जाएगा, जबकि यूपीए के खाते में 149 से 153 सीटें आएंगी। दोनों के बीच करीब 22 सीटों का अंतर रहेगा।
हालांकि, इन आंकड़ों पर गौर करते वक्त इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि जिन 18 राज्यों में यह सर्वे किया गया, उनमें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम को छोड़कर पूर्वोत्तर और दिल्ली को छोड़कर दूसरे केंद्रशासित प्रदेश शामिल नहीं हैं।
इन सभी जगह कुल 32 लोकसभा सीट हैं, जिनमें से कांग्रेस के पास फिलहाल 16 और भाजपा के पास 7 हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने हाल में झारखंड में जेएमएम से हाथ मिलाया है, जो बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी दोस्त खोज सकती है।
साथ ही अगर यूपीए सरकार मई 2014 में होने वाले चुनावों से पहले तेलंगाना राज्य का ऐलान करती है, तो आंध्र प्रदेश का चुनावी गणित बदल सकता है।