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प्रोटेम स्पीकर
Updated Wed, 01 Jan 2014 08:17 PM IST
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दिल्ली विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। पहले दिन सदन का संचालन कांग्रेस विधायक मतीन अहमद ने प्रोटेम स्पीकर (अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष) की हैसियत से किया।
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प्रोटेम स्पीकर उन्हें कहा जाता है, जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो कामचलाऊ और अस्थायी अध्यक्ष ही प्रोटेम स्पीकर हैं। लोकसभा अथवा विधानसभाओं में इनका चुनाव बेहद कम वक्तों के लिए होता है।
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सामान्यतः सदन के वरिष्ठतम सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले अस्थायी तौर पर वे सदन के संचालन से संबंधित दायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक सदस्य स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न कर लें।
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हालांकि लोकसभा अथवा विधानसभाओं में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत तब भी पड़ती है, जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों का पद खाली हो जाता है। यह स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों की मृत्यु हो जाए अथवा वे अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दें।
संविधान में, हालांकि प्रोटेम स्पीकर की शक्तियां स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई हैं, लेकिन यह तय है कि उनके पास स्थायी अध्यक्ष की तरह शक्तियां नहीं होतीं। दिल्ली विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के समक्ष्ा विश्वास मत प्रस्ताव की कार्यवाही के संचालन की जिम्मेदारी होगी। हालांकि यह कार्य पारंपरिक तौर पर स्थायी अध्यक्ष ही करते रहे हैं।