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चीन को कितना बदल पाएंगे शिनपिंग

Mon, 12 Nov 2012 11:30 AM IST
Updated Mon, 12 Nov 2012 11:30 AM IST
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Editorial 12 nov
यह महज संयोग ही है कि अमेरिका में बराक ओबामा की दूसरी पारी के साथ पड़ोसी चीन में शी जिनपिंग के नेतृत्व में नए दौर का आगाज होने जा रहा है। चीन में वास्तविक सत्ता परिवर्तन तो अगले साल होगा, लेकिन हू जिंताओ के बाद चीन कौन-सी करवट लेने वाला है, इस पर स्वाभाविक ही पूरी दुनिया की निगाहें हैं।
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हू जिंताओ के नेतृत्व में चीन ने हालांकि अभूतपूर्व तरक्की की; उन्होंने अपने मुल्क को दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था तो बनाया ही, अंतरिक्ष अभियान और ओलंपिक के आयोजन के जरिये बाहरी दुनिया में उन्होंने अपनी क्षमता और नजरिये का लोहा भी मनवाया।
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लेकिन चीन के समाज को पहले की ही तरह बंद रखकर, किसानों का दोहन बरकरार रखकर और मानवाधिकारों के प्रति तानाशाही बरतकर उन्होंने पुरातनपंथी कम्युनिस्टों का ही अनुसरण किया, जबकि सोशल मीडिया के इस दौर में चीन में भी सिविल सोसाइटी का अच्छा-खासा प्रभाव हो गया है, जो कम्युनिस्ट तानाशाही के खिलाफ बेधड़क बोलती है।
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इसी तरह हू की अर्थनीति ने जहां अमीरों और गरीबों के बीच फर्क बढ़ाया, वहीं बड़े लोगों को भ्रष्टाचार के लिए भी दुष्प्रेरित किया। इसलिए दस साल बाद विश्लेषक हू जिंताओ के कार्यकाल को 'खोई हुई सदी' बता रहे हैं। सवाल यह है कि शी जिनपिंग क्या जिंताओ की अव्यावहारिक नीतियों को पलट सकेंगे।

तेज औद्योगिकीकरण के कारण वहां असंख्य छोटे किसानों को अपनी आजीविका से वंचित होना पड़ा है, ऐसे में क्या उन्हें भूस्वामी बनाने की ऐतिहासिक पहल की जाएगी, जैसे कि पार्टी कांग्रेस में संकेत मिले हैं? क्या अर्थनीति के मौजूदा रास्ते से हटकर निजी उद्यमियों के लिए माहौल बनाया जाएगा? और क्या कम्युनिस्ट नेतृत्व की पांचवीं पीढ़ी मानवाधिकार का ध्यान रखते हुए खुलेपन की ओर बढ़ेगी?


शी जिनपिंग की शख्सियत को देखते हुए फिलहाल उनसे किसी बड़े कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती, तब तो और नहीं, जब खुद जिंताओ पश्चिम की तरह के बदलाव के खिलाफ हैं। फिर पोलित ब्यूरो भी उन्हें कोई कदम उठाने शायद ही दे। लेकिन हू जिंताओ चीन को जिस मोड़ पर छोड़कर जा रहे हैं, वहां से उसे आगे ले जाने के लिए सिर्फ कम्युनिस्ट परंपराओं का पालन काफी नहीं होगा। अब यह जिनपिंग पर निर्भर करेगा कि वह पुराने कम्युनिस्टों को नाराज न करते हुए चीन को आगे ले जाने का साहस करेंगे या हू जिंताओ की छाया में बने रहना पसंद करेंगे।
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