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यमुना में पानी नहीं, गंदगी बहती है: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Tue, 04 Dec 2012 11:37 PM IST
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अरबों खर्च करने के बावजूद यमुना मैली की मैली है। इस पर अपनी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बेहद निराशाजनक स्थिति है। 12 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना नदी एक गंदा नाला बनी हुई है।
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सर्वोच्च अदालत ने सलाह दी कि दिल्ली से सटे हुए शहरों से सारी गंदगी इसी नदी में डाली जा रही है, जिसे रोका जाना बेहद जरूरी है। स्वतंत्र कुमार और मदन बी लोकुर की बेंच ने अवलोकन किया कि दिल्ली में यमुना नदी में पानी नहीं गंदगी बहती है।
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बेंच ने आम आदमी के हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद नदी को साफ नहीं कर पाने के लिए सरकार को लताड़ लगाई। बेंच ने कहा, ‘क्या हम नालों को दिल्ली से 30-40 किमी बाहर ले जाकर इसके पानी को रिसाइकल कर सकते हैं। बंद नालों के रूप में इसे वहां पर भेजा जाना चाहिए, जहां पर सरकार को अपना प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए उपयुक्त जमीन मिल सके।’
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उन्होंने कहा कि यमुना की सफाई से जुड़े प्रोजेक्ट में सरकारी विभाग एक दूसरे का सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह बेहद दुख की बात है कि इस ढंग से यमुना कभी भी साफ नहीं हो सकती। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली जल बोर्ड गंदगी के लिए एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं। इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। आपसी सहयोग न करने की वजह से ही यमुना की यह हालत हुई है। उन्होंने आईआईटी, दिल्ली और रूड़की से इस प्रोजेक्ट में मदद लेने की भी बात कही।