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विश्व खाद्य दिवस: भूख के खिलाफ एकजुटता

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 16 Oct 2012 11:59 AM IST
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world unites on world food day

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दुनिया में एक तरफ ऐसे लोग हैं जिनके घर में खाना खूब बर्बाद होता है और फेंक दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जिनको एक जून की रोटी के भी लाले हैं। खाद्यान्न की इसी समस्या को देखते हुए 16 अक्टूबर को हर साल विश्व खाद्य दिवस की घोषणा की गई थी।
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विश्व में पैदा किए जाने वाले खाद्य पदार्थ में से लगभग आधा हर साल बिना खाए सड़ जाता है। विकसित और विकासशील देश का यहीं हाल है। गरीब देशों में तो इनकी बड़ी मात्रा खेतों के पास ही बर्बाद हो जाती है। भारत में भी लाखों टन अनाज खुले में सड़ जता है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब करोड़ों लोग भूखे पेट सो रहे हैं।


हाल ही हुए एक शोध से यह भी पता चला है कि भारत में विवाह-समारोहों में खाने की जबरदस्त बर्बादी होती है। शोध में पाया गया कि सिर्फ बंगलूरू शहर में हुई शादियों में करीब 950 टन खाद्य पदार्थ बर्बाद हुआ। समस्या सिर्फ खाना फेंकने की ही नहीं है, शादियों के भोजन में कैलौरी भी जरूरत से ज्यादा होती है। भारत में जहां कुपोषण की बड़ी समस्या है तो फिर जरूरत से ज्यादा कैलौरी वाला खाना खिलाना भी एक तरह की बर्बादी है।

विश्व खाद्य उत्पादन पर एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में मजबूत आर्थिक प्रगति के बावजूद भुखमरी की समस्या से निपटने की रफ्तार बहुत धीमी है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में खाद्यान्न का इतना भंडार है जो प्रत्येक स्त्री, पुरुष और बच्चे का पेट भरने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग ऐसे हैं जो दीर्घकालिक भुखमरी और कुपोषण या अल्प पोषण की समस्या से जूझ रहे हैं।

खाद्यान्न की इसी समस्या को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने विश्व खाद्य दिवस की घोषणा की थी। 16 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में वर्ल्ड फूड डे की शुरुआत हुई जो अब तक चली आ रही है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया में भुखमरी खत्म करना है। 2012 के विश्व खाद्य दिवस की थीम “कृषि सहकारी समितियां- दुनिया को खिलाने के लिए अहम” है।

बढ़ते पेट्रोल के दामों और जनसंख्या विस्फोट की वजह से आज खाद्य पदार्थों के भाव आसमान पर जा रहे हैं जिसे काबू करना किसी भी सरकार के बस में नहीं है। ऐसे में सही रणनीति और किसानों को प्रोत्साहन देने से ही खाद्यान्न की समस्या को दूर किया जा सकता है।

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