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सत्ता में नहीं आए फिर भी शरद बनेंगे किंगमेकर!
Updated Sun, 09 Nov 2014 11:48 PM IST
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एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को ऐसे ही मराठा क्षत्रप नहीं कहा जाता। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में उनके सिवाय कोई और सियासत का बाजीगर नहीं बन सकता।
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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन टूटने से लेकर महाराष्ट्र में सत्ता समीकरण में एनसीपी की भूमिका को राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो यह बात साफ हो जाती है कि शरद पवार ही महाराष्ट्र के किंगमेकर हैं।
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19 साल पहले 1995 में जब पहली बार भाजपा-शिवसेना की सरकार बनी थी, तब भी पर्दे के पीछे शरद पवार की भूमिका थी। तब शिवसेना के 73 और भाजपा के 65 यानी कि कुल 138 विधायक।
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महाराष्ट्र में सियासत के बाजीगर एनसीपी प्रमुख
कहा जाता है कि शरद पवार ने ही निर्दलियों को समर्थन के लिए राजी किया और महाराष्ट्र में पहली बार भाजपा-शिवसेना की सरकार बनी। अगर पवार नहीं चाहते तो मनोहर जोशी कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। अब जब महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब भी भाजपा व सहयोगी दलों का आंकड़ा 138 ही है। इसे संयोग ही कहा जा सकता है।
गनीमत यह थी कि उस समय 20 से अधिक निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। अब शिवसेना के विपक्ष में बैठने के निर्णय के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार को बहुमत दिलाने में शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई हैं।
25 साल पुरानी भाजपा-शिवसेना की दोस्ती टूटने और बनने की गुंजाइश के बीच फिर से हुए संबंध विच्छेद के रंगमंच का मुख्य किरदार शरद पवार ही हैं। अगर शिवसेना ने विपक्ष में बैठने का फैसला कर लिया तो राज्य में पहली बार सत्ता में आई भाजपा के पास एनसीपी के सहारे के सिवाय कोई चारा नहीं है। इस तरह पवार एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका में होंगे।
गनीमत यह थी कि उस समय 20 से अधिक निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। अब शिवसेना के विपक्ष में बैठने के निर्णय के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार को बहुमत दिलाने में शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई हैं।
25 साल पुरानी भाजपा-शिवसेना की दोस्ती टूटने और बनने की गुंजाइश के बीच फिर से हुए संबंध विच्छेद के रंगमंच का मुख्य किरदार शरद पवार ही हैं। अगर शिवसेना ने विपक्ष में बैठने का फैसला कर लिया तो राज्य में पहली बार सत्ता में आई भाजपा के पास एनसीपी के सहारे के सिवाय कोई चारा नहीं है। इस तरह पवार एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका में होंगे।