फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas

विजय दिवस: वो जांबाज, जो घर तो लौटे लेकिन तिरंगे में लिपटकर

Sun, 26 Jul 2015 10:28 AM IST
Updated Sun, 26 Jul 2015 10:28 AM IST
विज्ञापन
We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas
देश विजय दिवस के उपलक्ष्य में अपने वीर सपूतों को याद कर गौरांवित हो रहा है। हम ऐसे ही वीरों की अंतिम कसम को याद कर उन्हें नमन कर रहे हैं। वर्ष-1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वीरों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को सबक सिखाया था।
विज्ञापन


करीब दो माह तक लगातार युद्ध कर पाकिस्तानी सेना को छठी दूध याद दिला दिया था। पाकिस्तानी ऊंची पहाड़ियों से बम बरसा रहे थे, लेकिन हमारे वीरों ने जान की परवाह किए बगैर दुर्गम पहाड़ियों को पार किया और दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
विज्ञापन


लड़ाई पर जाने से पहले वीरों ने अपने परिवार वालों से कहा था कि दुश्मन को खदेड़कर ही घर लौटेंगे। हुआ भी ऐसा ही। उन्होंने दुश्मन सेना को कारगिल से खदेड़ दिया और घर भी लौटे, लेकिन तिरंगे में लिपटकर।
विज्ञापन
विज्ञापन

मनोज ने खाई थी तिरंगा लहराने की कसम

We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas

मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी में 29 अगस्त 1969 को जन्मे मेजर मनोज तलवार सच्चे देशभक्त थे। 11 जून 1999 को 19 हजार फीट ऊंची चोटी टूरटोक लद्दाख में वह सैनिकों का नेतृत्व करते हुए ऊपर चढ़े थे। चोटी से पाक सेना बम बरसा रही थी, लेकिन मेजर के कदम नहीं डगमगाए। उन्होंने कसम खाई थी कि चोटी पर तिरंगा लहराकर ही लौटूंगा। 13 जून को उन्होंने तिरंगा लहराया, लेकिन दुश्मनों की गोलियों का सामना करते हुए वह शहीद हो गए।

उनके पिता पीएल तलवार ने बताया कि जब मनोज से अंतिम बार बात हुई थी तो उन्होंने लड़ाई की बात बताई थी। बेटे ने कहा था कि वह तभी लौटेगा, जब दुश्मनों को खदेड़ देगा। पीएल तलवार ने कहा कि लड़ाई में शहीद हुआ हर जवान मेरे बेटे की तरह था। उनका जज्बा हिमालय की चोटी से भी ऊपर था। बेटे की आवाज कड़क थी और दिल में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी। पीएल तलवार की आंखों में एक दर्द आज भी साफ झलकता है। वह है शहीद की प्रतिमा हटाने का।

पीएल तलवार कहते हैं कमिश्नरी आवास चौराहे के बीचों बीच मनोज की प्रतिमा लगी थी, लेकिन एमडीए के अधिकारी और ठेकदार ने सौंदर्यीकरण के नाम पर उसे हटा दिया है। अब प्रतिमा को सड़क के किनारे फुटपाथ पर लगवा दिया है। इससे वह बेहद आहत हैं।

दोस्त कारगिल में हैं, मैं घर नहीं रह सकता

We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas

ललियाना निवासी 22 ग्रेनेडियर जुबेर के जवान अहमद पुत्र जर्रार अहमद के दिल में भी देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। लड़ाई से पहले वह छुट्टी पर थे। लेकिन, कुछ दिन बाद ही लड़ाई शुरू हो गई।

जब वह जाने लगे तो परिवार वालों ने रोकना चाहा। लेकिन, जुबैर ने कहा कि मेरे साथी कारगिल में युद्ध लड़ रहे हैं तो मैं घर कैसे बैठ सकता हूं। वह बॉर्डर पर चले गए।

कुछ दिन बाद उनके शहीद होने की खबर मिली। पिता जर्रार अहमद का देहांत हो चुका है, जबकि मां बुढ़ापे में संघर्ष कर रही हैं।

‘दुश्मन को खदेड़कर ही चैन मिलेगा’

We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas

सीएसएम यशवीर सिंह 12 जून 1999 में तोलोलिंग पहाड़ी पर पाकिस्तानी सेना से युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। उनकी पत्नी मुनेश आज भी अपने पति के आखिरी शब्दों को याद कर भावुक हो जाती हैं। मुनेश ने बताया कि जब पति से अंतिम बार बात हुई थी तो वह कुछ परेशान थे।

उन्होंने बताया था कि दुश्मन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है। हमें उन्हें खदेड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे पूरा करना ही मेरा धर्म है। परिवार की कुशलता को लेकर भी यशवीर चिंतित थे। शहीद यशवीर का परिवार रोहटा रोड पर रहता है।

मुनेश ने बताया कि पति की शहादत के बाद फाजलपुर क्षेत्र के सैकड़ों युवक सेना में भर्ती हुए। अब भी सैकड़ों युवक भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। मुनेश चार साल से लगातार रोहटा रोड बाईपास पर सीएनजी पेट्रोल पंप के लिए प्रयास कर रही हैं, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।

सरकार भूली है सम्मान

We salutes to sons of Mother India on Vijay Diwas

कारगिल युद्ध में 92 शहीदों के नाम माल रोड स्थित शहीद स्मारक पार्क में शिलापट पर अंकित हैं, लेकिन बहुत से शहीदों के परिवार आज भी कष्ट में जीवन यापन कर रहे हैं।

सरकार उन्हें भूल चुकी है। 236 बंगाल इंजीनियर ग्रुप के सतीश की शहादत के सम्मान में गैस एजेंसी दी गई।

पत्नी विमलेश और भाई शिवकुमार के अनुसार कुछ अन्य लोगों ने गड़बड़ी कर उनका लाइसेंस निरस्त करवा दिया।


विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed