फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   vote share doesn't show a rosy picture for bjp

दिल्ली में BJP का 20 साल में सबसे खराब प्रदर्शन!

Tue, 10 Dec 2013 04:13 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 10 Dec 2013 04:13 PM IST
विज्ञापन
vote share doesn't show a rosy picture for bjp

रविवार को आए नतीजों में भाजपा की जीत से उठा गुबार अब धीरे-धीरे बैठ रहा है। और इसके साथ ही राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में बड़े राजनीतिक दलों के प्रदर्शन से जुड़ी दिलचस्प चीजें भी सामने आ रही हैं।

विज्ञापन


तीन राज्यों में भाजपा को सीटों के मामले में एकतरफ जीत मिली, जबकि राजधानी में भी वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। दिल्ली में उसका खेल आम आदमी पार्टी ने बिगाड़ा।
विज्ञापन


लेकिन वोटों की गिनती से अलहदा अगर वोट शेयर के प्रतिशत पर गौर किया जाए, तो काफी दिलचस्प कहानी सामने आ सकती है। इस मामले में विजेता और हारने वाली टीम के बीच ज्यादा फासला नहीं दिख रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली में क्या रहा हिसाब-किताब
दिल्ली में भले भाजपा सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी, लेकिन विश्लेषण बताता है कि 70 सीटों वाली विधानसभा में 32 पर जीत दर्ज करने के बावजूद भाजपा का वोट शेयर 20 साल में सबसे कम रहा।

दिल्ली में भाजपा को 33 फीसदी वोट शेयर मिला, जो पिछले चुनावों की तुलना में 2 फीसदी कम है। वोट शेयर के मामले में भाजपा का यह 20 साल का सबसे खराब प्रदर्शन है।

राहुल होंगे कांग्रेस के पीएम उम्मीदवार?

भाजपा को अगर आम आदमी पार्टी से नुकसान हुआ, तो फायदा भी मिला। आप ने भगवा दल से कहीं ज्यादा वोट कांग्रेस के खाए। कांग्रेस का वोट शेयर करीब 16 फीसदी गिर गया, जो 1993 में विधानसभा गठित होने के बाद से सबसे कम है।

छत्तीसगढ़ में बेहद करीबी मामला
रविवार को छत्तीसगढ़ में हुई मतगणना के दौरान दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। दिलचस्प है कि भाजपा ने कांग्रेस से दस सीटें ज्यादा जीती हैं, लेकिन उसका वोट शेयर विरोधी पार्टी से केवल 0.77 फीसदी ज्यादा रहा।

कांग्रेस को आदिवासी बेल्ट में नौ सीटों का फायदा हुआ, लेकिन भाजपा ने इसकी भरपाई रायपुर और बिलासपुर में दस सीट जीतकर की।

राजस्थान में भी भाजपा उछली
राजस्थान में जरूर भाजपा की लहर दिखी। वहां उसका वोट शेयर 11.76 फीसदी बढ़कर 46.03 फीसदी पर पहुंच गया। कांग्रेस का शेयर केवल 3.14 फीसदी गिरा, लेकिन उसे इसकी वजह से 75 सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

यहां पर भाजपा को शायद मोदी का साथ मिला, क्योंकि पार्टी के कुछ कमजोर उम्मीदवार भी जीतने में कामयाब साबित हुए।

एमपी में कांग्रेस भी बढ़ी
अब मध्य प्रदेश की बात करते हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट शेयर में इस बार इजाफा हुआ है। भाजपा ने 44.87 फीसदी वोट मिले, जबकि 2003 में उसे सबसे ज्यादा 42.5 फीसदी मत मिले थे। कांग्रेस का वोट शेयर भी करीब चार फीसदी बढ़ा है।

'दाग' कायम, अभी भी 25 विधायकों पर क्रिमिनल केस


दिलचस्प है कि पहली बार मतदान के दौरान इस्तेमाल NOTA के विकल्प को 1.9 फीसदी वोट मिले, जिसकी वजह से वह भाजपा, कांग्रेस, बसपा के बाद चौथी सबसे बड़ी पार्टी बन गया।

तैयारी की जरूरत भाजपा को भी है
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भाजपा ने भले चुनावों में ज्यादा सीटें जीतने में कामयाबी पाई है, लेकिन उसे ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह वोट शेयर है।

चारों राज्यों में बुरी तरह हारने के बावजूद कांग्रेस ने वोट शेयर के मामले में इतना खराब प्रदर्शन नहीं किया। दिल्ली को छोड़ दिया जाए, तो ऐसा आंकड़े साफ बता रहे हैं।

अन्य राज्यों की खबरें पढें यहां..

दिल्ली की ताजा खबरें पढ़ें यहां..

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed