उदय प्रकाश ने मोदी के भाषण को वाजपेयी से बेहतर बताया
हिंदी के चर्चित लेखक उदय प्रकाश जिन्होंने कन्नड़ साहित्यकार और विचारक एमएम कलबुर्गी की हत्या और बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार सबसे पहले लौटाया था, उन्होंने अपने एक फेसबुक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। बताते चलें कि पीएम मोदी शुक्रवार को संविधान दिवस पर हुई चर्चा का जवाब संसद में दे रहे थे।
उदय प्रकाश ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि 'आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संसद में संविधान पर दिया गया भाषण किसी ऐतिहासिक अभिलेख कि के किसी महत्वपूर्ण राजकीय दस्तावेज की तरह महत्वपूर्ण है। इतना लोकतांत्रिक, समावेशी, उदार और विनम्र संभाषण कम से कम इस प्रभावी शैली में मैंने अपने जीवन में नहीं सुना।'
उन्होंने लिखा है कि वो अपनी वाकपटुता में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से कई कदम आगे हैं। हालांकि उनकी इस बात से बीजेपी के अंदर के लोग भी असहमत हो सकते हैं। उदय प्रकाश ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए लिखा है बावजूद कि वो तथ्यों और इतिहास संबंधी भूलों और गलतियों के बाद भी वो अब तक के एक बेजोड़ प्रवक्ता हैं।
उदय प्रकाश ने लिखा-बहुत खुशी हुई
हालांकि अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इस बात की आशंका जताई है कि हो सकता है कि देश की जनता का मूड भांपकर और अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए भी ऐसी चालाक युक्ति चली गई हो।
उन्होंने लिखा है कि पीएम मोदी का यह भाषण 'संभाषण भारत की विविधता, बहुसांख्यिकता,बहुलता के प्रति उनके सम्मान को प्रकट करने वाला था। बहुत खुशी हुई।'.
उन्होंने लिखा है कि 'अब उम्मीद है वे अपने सांप्रदायिक, जातिवादी, हिंसक, असामाजिक और उग्र हिंदुत्ववादी तत्वों को भी कानून और संविधान के दायरे में लाकर उन पर सख्त कार्रवाई करेंगे।'
'पर अब भी विश्वास नहीं होता'
अपने फेसबुक पोस्ट के आखिर में उन्होंने यह भी लिखा है कि 'राजनीति जिन हाथों में हैं, पता नहीं क्यों अभी भी दोस्तों उस पर विश्वास नहीं होता'।
बताते चलें कि उदय प्रकाश के पुरस्कार लौटाने के बाद से ही साहित्य और कला जगत के साथ-साथ विज्ञान की दुनिया के लोगों ने भी अपने पुरस्कार लौटाने शुरु कर दिए थे।
यहां पढ़ें फेसबुक पोस्ट
आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का संसद में संविधान पर दिया गया भाषण किसी ऐतिहासिक अभिलेख की, किसी महत्वपूर्ण राजक...
Posted by Uday Prakash on Friday, 27 November 2015