SC ने आरोपी जज के खिलाफ जारी किया नोटिस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज के खिलाफ एक महिला अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज (एडीएसजे) द्वारा लगाए यौन उत्पीड़न के मामले में गठित जांच पैनल की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
शिकायतकर्ता ने जांच पैनल को रद्द कर अन्य हाईकोर्ट के दो चीफ जस्टिसों वाली नई कमेटी गठित करने की मांग की है।
जस्टिस जेएस केहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के जज को नोटिस जारी करने के अलावा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के महासचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से भी जवाब मांगा है।
सुनवाई के बाद पीठ ने कहा, ‘आगे की कार्यवाही तक मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस द्वारा 8 अगस्त को जारी आदेश पर रोक लगाई जाती है।’
आरोपी जज को नोटिस जारी किया
ग्वालियर की पूर्व महिला जज ने हाईकोर्ट के जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस महिला जज की शिकायत पर मामले की जांच के लिए नियुक्त न्यायिक पैनल पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।
इस महिला जज ने कहा था कि उनके द्वारा हाईकोर्ट के खिलाफ लगाए आरोपों की जांच के लिए दो पूर्व चीफ जस्टिस और हाईकोर्ट के एक जज की समिति नियुक्त की जाए।
अपनी दलील में इस महिला जज ने कहा, ‘मेरा इस्तीफा एक ‘कंस्ट्रक्टिव टर्मिनेशन’ है। मुझे मिलने वाले सभी लाभों के साथ मेरे पद पर बहाल किया जाए।’
अपनी याचिका में महिला न्यायाधीश ने कहा, ‘हाई कोर्ट के 8 अगस्त के न्यायिक पैनल बनाने के लिए आदेश को रद्द कर दिया जाना चाहिए। मेरा मानना है कि यह पैनल मेरे साथ इंसाफ नहीं करेगा।’
महिला जज का यौन उत्पीड़न किया
महिला न्यायाधीश ने दायर याचिका में कहा गया, ‘मेरी शिकायत पर जांच के लिए भारत के चीफ जस्टिस को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के बाहर से दो चीफ जस्टिस, एक हाई कोर्ट जज तथा एक बाहरी गैर न्यायिक सदस्य की समिति नियुक्त करने का अधिकार है।’
इस महिला न्यायाधीश ने अपनी शिकायत में हाई कोर्ट के जज को समिति में नियुक्ति करने पर ऐतराज जताए थे।
उन्होंने कहा था कि वह जज जिसने उनका यौन उत्पीड़न किया, अभी भी उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों की न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहा है।
जांच के लिए ग्वालियर की महिला जज और उनके पति को मौजूद रहने के लिए समन भेजे गए थे। इस पर भी इस महिला ने ऐतराज जताया है।