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एक मरा हुआ आदमी 14 साल हुआ जिंदा!

Sat, 20 Sep 2014 04:03 PM IST
मनीष शांडिल्य/पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मनीष शांडिल्य/पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Sat, 20 Sep 2014 04:03 PM IST
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story of one died man who live on after 14 year

पटना पुलिस ने परसबिगहा नरसंहार के एक ऐसे दोषी को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया जो पुलिस रिकॉर्ड में लगभग 14 साल से एक मृतक के रूप में दर्ज था।

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विनय कुमार सिंह इस नरसंहार के मुख्य दोषियों में से एक हैं जिन्हें पुलिस ने शास्त्री नगर थाना इलाक़े के नारायण सिटी अपार्टमेंट से उनके बेटे गौरव सिंह के फ्लैट से गिरफ्तार किया।
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पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनु महाराज ने इसकी पुष्टि की है। विनय के जीवित होने और पटना में छिपे होने की सूचना पुलिस को जहानाबाद से मिली थी और उनके ख़िलाफ़ वारंट भी जारी किया गया था।
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गिरफ्तारी के बाद उन्हें जहानाबाद पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक़ साल 2000 में विनय को सात दिन का पैरोल मिला था। लेकिन विनय पैरोल का समय ख़त्म होने के बाद भी जेल वापस नहीं लौटे थे।


मृत्यु का शपथपत्र
इस घटना के कुछ दिनों बाद विनय के बेटे गौरव सिंह ने शपथपत्र दाख़िल किया कि उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है। इतना ही नहीं, परिजनों ने पुलिस को चकमा देने के लिये गांव में उनका दाह-संस्कार और श्राद्ध तक कर दिया था।

पुलिस के अनुसार उनकी पत्नी भी विधवा की तरह ही रहती थीं। परसबिगहा नरसंहार को याद करते हुये भारतीय जन अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि मौजूदा जहानाबाद ज़िले में स्थित परसबिगहा गांव में ये नरसंहार वर्ष 1980 में हुआ था जिसमें एक दर्ज़न से अधिक लोग मारे गए थे।

मिथिलेश ने यह भी बताया कि तब जहानाबाद, गया ज़िला का हिस्सा हुआ करता था। मारे गए लोगों में सभी अति पिछड़े और दलित थे।

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