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शास्त्री जी के बारे में ये जानते हैं आप!

Wed, 16 Apr 2014 03:35 PM IST
शालिनी वाजपेयी/अमर उजाला, बरेली
शालिनी वाजपेयी/अमर उजाला, बरेली Updated Wed, 16 Apr 2014 03:35 PM IST
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stories of lalbahadur shasri

देश लाल बहादुर शास्त्री की सादगी और ईमानदारी का कायल था और आगे भी रहेगा। बरेली आए उनके बेटे अनिल शास्त्री ने बातचीत में ऐसे ही कुछ संस्मरण सुनाए जो उनके पिता की पहचान को मुक्कमल करते हैं।

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अनिल शास्त्री बताते हैं, लाल बहादुर शास्त्री 1962 में गृह मंत्री थे। लोकसभा चुनाव हो रहे थे। प्रचार के लिए लाल बहादुर शास्त्री परिवार के साथ इलाहाबाद से निकले तो कुछ दूर जाने पर उनकी जिप्सी खराब हो गई। शास्त्री जी के कहने पर उधर से जाती हुई रोडवेज बस रुकवाई गई। शास्त्री जी परिवार के साथ बस में सवार हो गए। परिचालक से टिकट बनाने को कहा, लेकिन वह टिकट बनाने को राजी नहीं था।
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शास्त्री जी ने उसे यह कहकर समझाया, अभी मैं चुनाव प्रचार कर रहा हूं, व्यक्तिगत काम पर होने की वजह से टिकट जरूर बनवाऊंगा। अंतत: परिचालक को गृहमंत्री का टिकट बनाना ही पड़ा। अनिल ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब ‘लाल बहादुर शास्त्री लेसंस इन लीडरशिप’ में भी किया है।

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प्रतिद्वंद्वियों का करते थे आदर

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शास्त्री जी अपने प्रतिद्वंद्वियों का भी बहुत आदर करते थे। बकौल अनिल, 1962 में मतदान से एक दिन पहले शास्त्री जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे प्रजातांत्रिक सोशलिस्ट पार्टी के राधेश्याम पाठक ने उनको सपरिवार खाने पर बुलाया। जब भोजन हो चुका तो पाठक जी बोले, लाल बहादुर आज मेरा बहुत नुकसान हो गया। यह सुनते ही शास्त्री जी ने अपनी पत्नी से कहा, देख लो भाई कितना हुआ है, इनको दे देना।

इस पर राधेश्याम पाठक बोले, मैं रुपये की नहीं, वोट की बात कर रहा हूं। आज आपसे मिलकर हमारे परिवार ने तय कर लिया है कि वे वोट आपको ही देंगे, अब इतने वोट तो मेरे कम हो गए। अगर मैं इस पार्टी में न होता तो मैं आपको ही वोट करता, क्योंकि मैं आपको अपने से बेहतर प्रत्याशी मानता हूं।

राधेश्याम की यह बात सुनने के बाद लाल बहादुर शास्त्री बोले, आपका वोट लेकर मैं जीतना नहीं चाहता! यह थी उनके स्वभाव की सरलता। इस सरलता के साथ ही वह आदर्शवादी जीवन में वह बहुत सख्त थे।

बेटे के ड्राइविंग लाइसेंस पर खफा हुए शास्त्री जी

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अनिल शास्त्री बताते हैं, मैंने 14 साल की उम्र से ही ड्राइवर से गाड़ी चलानी सीख ली थी। 16 साल की उम्र पर मैंने पीए कैलाश नारायण से कहा, मैं गाड़ी चला लेता हूं मुझे ड्राइविंग लाइसेंस दो। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस मिल गया। उसे पाकर मैं बहुत खुश हुआ और तुरंत बाबू जी के पास गया।

बोला, एक गुड न्यूज है। मुझे ड्राइविंग लाइसेंस मिल गया। ड्राइविंग लाइसेंस देखते ही उन्होंने कहा, यह तुम्हें कैसे मिल गया। मैंने कहा, अरे मैं प्रधानमंत्री का बेटा हूं! पूछा, किसने दिया! उन्होंने तुरंत कैलाश नारायण को बुलाया।

बोले, कैलाश बाबू मैं नाराज नहीं हूं लेकिन मेरे दिल को बहुत चोट पहुंची। आज प्रधानमंत्री आवास के प्रांगण में देश का एक कानून टूट गया। बोले, यह ड्राइविंग लाइसेंस किस आरटीओ ने बनाया है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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