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अजीत पवार के इस्तीफे पर एनसीपी में फूट
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 26 Sep 2012 03:15 PM IST
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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे पर अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में ही मतभेद पैदा हो गया है। एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि अजीत पवार का इस्तीफा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को मंजूर करना चाहिए। वहीं एनसीपी के अधिकतर विधायक अजीत पवार के समर्थन में दिख रहे हैं।
बुधवार को हुई एनसीपी विधायक दल की बैठक में अजीत पवार को अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की गई। इधर प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया अजीत पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र में कोई उप मुख्यमंत्री नहीं होगा। माना जा रहा है कि अजीत पवार पर अंतिम फैसला पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ही लेंगे।
इससे पहले हजारों करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे से राज्य में सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल एनसीपी के अन्य सभी 20 मंत्रियों ने भी कांग्रेस पर दबाव बनाते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। एनसीपी के मंत्रियों ने कांग्रेस के साथ चल रही गठबंधन सरकार से हटने की मांग भी पार्टी नेतृत्व के सामने बुलंद कर दी है।
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उल्लेखनीय है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 61 और कांग्रेस के 82 विधायक हैं। शिवसेना के 45 और भाजपा के 47 विधायक हैं।
पवारों की पावर पॉलिटिक्स
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अजीत पवार का इस्तीफा पवारों की पावर पॉलिटिक्स का नतीजा है। कहा जा रहा है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं, इसलिए अजीत को पद से हटाया गया है। लेकिन अजीत को एनसीपी के कई विधायकों का समर्थन हासिल है।
क्या हैं आरोप
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 1999 से 2009 के बीच जल संसाधन मंत्री रहे अजीत पवार ने वर्ष 2009 में 20 हजार करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जबकि इसके लिए विदर्भ सिंचाई विकास निगम की गवर्निंग काउंसिल से जरूरी क्लीयरेंस भी नहीं लिया गया।
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बुधवार को हुई एनसीपी विधायक दल की बैठक में अजीत पवार को अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की गई। इधर प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया अजीत पवार के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र में कोई उप मुख्यमंत्री नहीं होगा। माना जा रहा है कि अजीत पवार पर अंतिम फैसला पार्टी सुप्रीमो शरद पवार ही लेंगे।
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इससे पहले हजारों करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोपों में घिरे महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इस्तीफे से राज्य में सियासत गरमा गई। राज्य सरकार में शामिल एनसीपी के अन्य सभी 20 मंत्रियों ने भी कांग्रेस पर दबाव बनाते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। एनसीपी के मंत्रियों ने कांग्रेस के साथ चल रही गठबंधन सरकार से हटने की मांग भी पार्टी नेतृत्व के सामने बुलंद कर दी है।
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उल्लेखनीय है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 61 और कांग्रेस के 82 विधायक हैं। शिवसेना के 45 और भाजपा के 47 विधायक हैं।
पवारों की पावर पॉलिटिक्स
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अजीत पवार का इस्तीफा पवारों की पावर पॉलिटिक्स का नतीजा है। कहा जा रहा है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं, इसलिए अजीत को पद से हटाया गया है। लेकिन अजीत को एनसीपी के कई विधायकों का समर्थन हासिल है।
क्या हैं आरोप
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 1999 से 2009 के बीच जल संसाधन मंत्री रहे अजीत पवार ने वर्ष 2009 में 20 हजार करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी, जबकि इसके लिए विदर्भ सिंचाई विकास निगम की गवर्निंग काउंसिल से जरूरी क्लीयरेंस भी नहीं लिया गया।