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‘अपराजिता’ ने बदली रेप पीड़िताओं की जिंदगी, क्या है अपराजिता?

Fri, 16 Oct 2015 07:37 AM IST
Updated Fri, 16 Oct 2015 07:37 AM IST
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special program for rape victims

दरिंदगी का शिकार बनीं जिन लड़कियों ने हंसना-बोलना ही नहीं, पढ़ना-लिखना तक  छोड़ दिया था, वे अब फिर से जमाने के साथ कदमताल कर रही हैं। इनकी मुरझाई सी जिंदगी में फिर से खिलखिलाहट ला दी है 'अपराजिता' ने।

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पुलिस के इस कार्यक्रम ने इन्हें हौसलों की नई उड़ान दी है। जो लड़कियां गर्दन झुकाकर भी बोल नहीं पाती थीं, वे अब सिर उठाकर अपनी उपलब्धियां बता रही हैं। आगरा की ये 30 बहादुर बेटियां अब पूरे प्रदेश की रेप पीड़िताओं के लिए प्रेरणा बनेंगी।
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इसकी शुरुआत हुई थी 20 नवंबर 2014 को। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 2009 से 2014 तक के रेप के मामलों का अध्ययन कराकर 15 साल उम्र तक की बच्चियों की सूची बनवाई। अभिभावकों समेत इन सभी की काउंसलिंग कराई गई।
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इसमें पता चला कि रेप के बाद लड़कियां ही नहीं, उनके माता-पिता भी टूट चुके हैं। गुनाह किसी और ने किया, लेकिन अपमानित खुद को महसूस कर रहे हैं। कई ने तो बच्चियों का घर से निकलना बंद कर दिया। 10 अभिभावकों ने बेटियों के स्कूल से नाम कटवा दिए। जरूरत इनकी मनोदशा बदलने की थी।

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अपराजिता ने बदल ली इनकी सोच

special program for rape victims

पहले चरण में पीड़िताओं की मेडिकल, लीगल, साइक्लॉजिकल काउंसलिंग हुई। पीड़िताओं में 1.5 से पांच साल तक की छोटी बच्चियां भी थीं। इनका उपचार कराया गया। पुलिस ने इन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया। इनके अभिभावकों की काउंसलिंग में उन्हें समझाया कि एक घटना से कुछ नहीं बदला है, वे सामान्य जिंदगी जिएं और बच्चियों को भी प्रोत्साहित करें। रेप पीड़िताओं के बीच कई प्रतियोगिताएं कराई गई।

मनोचिकित्सकों ने उनकी मनोदशा पढ़ी। 14 अक्तूबर की काउंसलिंग में पाया गया कि सभी सामान्य जिंदगी में लौट आई हैं। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने पीड़िताओं से मुलाकात की तो वे पढ़ाई लिखाई से लेकर खेलकूद और विभिन्न प्रतियोगिताओं की उपलब्धियां बताने लगीं।

12 साल की एक  बालिका का कहना था कि वह अब उस घटना को भूल आगे बढ़ना चाहती है। दो साल की बच्ची के पिता ने कहा, अपराजिता ने उसकी सोच बदल दी, वह किसी बेटी पर कोई बंदिश नहीं लगाएंगे।

शासन को भेजी जाएगी डॉक्यूमेंट्री
डीआईजी लक्ष्मी सिंह ‘अपराजिता’ शीर्षक से ही एक  डॉक्यूमेंट्री तैयार करा रही हैं। इसमें दिखाया जाएगा कि कैसे इन बच्चियों का आत्मविश्वास लौट आया। इसे शासन को भेजा जाएगा ताकि सरकार चाहे तो पूरे प्रदेश में अपराजिता जैसा कार्यक्रम लागू करा सके। इन बच्चियों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता पर दिलाया गया है।

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