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जासूसी मामले पर मोदी के पैनल को कोर्ट में चुनौती

Fri, 06 Dec 2013 07:10 PM IST
एजेंसी/अहमदाबाद
एजेंसी/अहमदाबाद Updated Fri, 06 Dec 2013 07:10 PM IST
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snoopgate: pil challenging legality of enquiry panel in guj hc

‘साहेब’ के निर्देश पर एक महिला की जासूसी से जु़ड़े मामले की जांच के लिए बने गुजरात सरकार के पैनल को चुनौती दी गई है।

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शुक्रवार को गुजरात हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मामले की जांच के लिए गठित सुगन्या भट्ट पैनल की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। समझा जाता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर महिला की जासूसी करवाई गई थी।

जनहित याचिका दायर करने वाले स्थानीय वकील गिरीश दास ने कहा है कि पैनल का गठन सिर्फ एक मामले की जांच के लिए हुआ है। जबकि जिस कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट, 1952 की धारा तीन के तहत इस पैनल का गठन हुआ है, वह सार्वजनिक महत्व के दायरे में नहीं आती।
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यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति से जुड़े मामले की जांच में ही लागू होती है। जबकि यह मामला सार्वजनिक महत्व का है। माना जा रहा है कि जासूसी का आदेश गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोगी अमित शाह ने दिया था।

गिरीश दास ने याचिका दायर कर पिछले छह महीने के दौरान उन 93,000 फोन टेपिंग की जांच कराने की मांग की है, जिन्हें कथित तौर पर राज्य सरकार के निर्देश पर अंजाम दिया गया था।

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गौरतलब है कि दो न्यूज पोर्टल कोबरापोस्ट.कॉम और गुलेल. कॉम ने 15 नवंबर को यह दावा किया था कि 2009 में किसी ‘साहेब’ के निर्देश पर तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने एक महिला की जासूसी का आदेश दिया था।

अपने दावे के समर्थन में दोनों न्यूज पोर्टल ने शाह और निलंबित आईपीएस अफसर जीएल सिंघल के बीच टेप की गई बातचीत जारी की थी। कांग्रेस और दूसरे कई संगठनों ने इस पर हंगामा खड़ा करते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।

इसके बाद पिछले 25 नवंबर को गुजरात सरकार ने इसकी जांच के लिए दो सदस्यीय पैनल बनाया था। इसमें रिटायर्ड जज सुगन्या भट्ट और पूर्व आईएएस अफसर केसी कपूर शामिल हैं। हालांकि राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा है कि पैनल का गठन लोगों की नजरों में धूल झोंकने के लिए किया गया है।

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