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उमर के अफजल प्रेम से केंद्र खफा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 12 Feb 2013 12:25 AM IST
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संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरू की फांसी को लेकर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उठाए सवालों को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है।
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केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने साफ कहा कि संविधान के तहत पूरी कानूनी प्रक्रिया से अफजल को फांसी दी गई। अजमल कसाब की तरह अफजल की फांसी को संवेदनशीलता के लिहाज से गुप्त रखा गया और इसमें कानून की कहीं अनदेखी नहीं हुई।
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गृहमंत्री ने फांसी को राजनीतिक फैसला बताए जाने के आरोपों को भी सिरे से नकार दिया। शिंदे ने साथ ही कहा कि यदि अफजल के परिजन तिहाड़ में उस जगह पर जाने का अनुरोध करेंगे जहां अफजल को दफनाया गया तो सरकार उस पर विचार करेगी। अफजल को राजीव गांधी के हत्यारों से पहले फांसी देने को लेकर लग रहे आरोपों को भी सरकार ने खारिज किया है।
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शिंदे ने कहा कि राजीव गांधी और बेअंत सिंह के हत्यारों का मामला अफजल के मामले से अलग है। ये मामले अब भी कोर्ट में लंबित हैं। शिंदे ने इन आरोपों को गलत बताया कि सरकार ने अफजल के परिवार को फांसी देने के फैसले से अवगत नहीं कराया। उन्होंने कहा कि परिवार को स्पीड पोस्ट के जरिए सूचना भेजी गई थी। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को भी पहले ही जानकारी दी गई थी।
जब उनसे पूछा गया कि स्पीड पोस्ट परिजनों के पास समय पर नहीं पहुंचा तो शिंदे ने कहा कि सारे काम गृह मंत्री नहीं कर सकता। उन्होंने सिर्फ इस सूचना पर दस्तखत किए थे। स्पीड पोस्ट जेल प्रशासन भेजता है। शिंदे ने माना कि मामले में गोपनीयता बरती गई। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यह काम खुलेआम होता तो कुछ दिक्कतें हो सकती थीं।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी उमर की बात को गलत बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जम्मू कश्मीर के हालात के मद्देनजर कुछ बातें कही है। मगर सरकार का फांसी का फैसला बिलकुल सही था। गौरतलब है कि उमर ने अफजल की फांसी को लेकर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को साबित करना होगा कि उसका यह फैसला राजनीतिक नहीं बल्कि न्यायिक है। उमर ने यह भी कहा था कि केंद्र सरकार को ऐसे अभियुक्तों के बारे में सवालों का जवाब देना होगा, जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। उमर ने राजीव गांधी और बेअंत सिंह के मामले का हवाला दिया था।