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उड़ीसा के लिए खरीदी कार का मोदी के मंत्री कर रहे थे इस्तेमाल

Tue, 22 Dec 2015 03:30 PM IST
Updated Tue, 22 Dec 2015 03:30 PM IST
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SAIL buy top SUV for Odisha mine inspection; car used by Minister

एक सनसनीखेज खुलासे में ये बात सामने आयी है कि जो एसयूवी सेल (SAIL) की खदानों के निरीक्षण के लिए इस्तेमाल की जानी थी वह प्रकाश जावडेकर दिल्ली में इस्तेमाल कर रहे थे।

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दरअसल फरवरी में बरसुआ स्थित सेल की माइंस को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की संतुति देने के लिए मंत्रालय ने अधिकारियों के दौरा करने के लिए सेल से एक एसयूवी की मांग की थी। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मांग के अनुसार चार माह के भीतर ही सेल ने बीस लाख रुपए की टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी खरीद कर मंत्रालय को दे दी। लेकिन ये गाड़ी भुवनेश्वर दफ्तर भेजी ही नहीं गयी और इसका इस्तेमाल अब तक दिल्ली में ही प्रकाश जावडेकर कर रहे थे।
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ये कोई नई बात नहीं है कि मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा माइंस की साइट के दौरे के लिए कंपनियों से वाहनों की मांग होती रहती है। सेल के बरसुआ माइंस ने ही 2011 में पांच बोलेरो और एक स्कोर्पियों जीप को उड़ीसा वन विभाग को दौरे के लिए दिया था पर इस तरह एसयूवी खरीदकर देने का मामला और वह भी दिल्ली ऑफिस को पहली बार सामने आया है।
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इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उसने जब एसयूवी खरीद के वक्त बरसुआ माइंस में जनरल मैनेजर के पद पर तैनात रहे एच बारा से पूछा की एसयूवी जो उड़ीसा के लिए खरीदी गयी उसे दिल्ली क्यों भेजा गया तो उन्होंने जवाब देने से मना कर दिया। वहीं इस बारे में सेल और वन मंत्रालय को किए गए ई-मेल और फोन का भी कोई जवाब नहीं मिला, बस मंत्री जी ने बैंगलुरू में होने की बात कहकर डायरेक्टर (वन) से मामले में अखबार का सहयोग की बात जरूर की, लेकिन वह भी बेनतीजा रही।

साथ ही जैसे ही अखबार ने 15 दिसंबर को मंत्रालय से एसयूवी के बारे में पूछा उसके अगले ही दिन से मंत्रालय ने एसयूवी से लालबत्ती उतारकर उसे पार्किंग लॉट में खड़ा कर दिया गया।

नियमों की अनदेखी की गई

SAIL buy top SUV for Odisha mine inspection; car used by Minister

रिकॉर्ड से पता चलता है कि 10 फरवरी 2015 वाहन खरीद के लिए मंत्रालय ने जो संतुति भेजी थी उसमें वाहन के मेक और मॉडल का जिक्र नहीं था,लेकिन सेल के डिप्टी जनरल मैनेजर (लाइसिन ) ने एक हफ्ते बाद ही पूछा कि टोयोटा फॉर्च्यूनर मॉडल 4×2 MT, 3.0 लीटर जोकि सफेद रंग की कब तक भेजी जाए।

17 जून को रिकॉर्ड के अनुसार एक एसयूवी खरीदकर दिल्‍ली ऑफिस को दे दी गयी। इस गाड़ी को अंडर सेक्रेटरी के नाम पर रजिस्टर्ड किया गया,लेकिन इस्तेमाल जावडेकर कर रहे हैं। जबकि अगस्त 2014 के रेगुलेशन के हिसाब से एक मंत्री सरकारी गाड़ी की खरीद के लिए 4.75 लाख ही खर्च कर सकता है। जैसा की जावड़ेकर के अन्य साथी ( कैबिनेट मंत्री ) कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भाजपा सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद 30 मई 2014 में ही सेल की माइंस को कुछ पेनाल्‍टी के साथ संतुति दे दी गयी। हालांकि इस माइन को पूरी तरह से संतु‌ति सुप्रीम कोर्ट के नियमों में ढील ‌दिए जाने के बाद ही मिल सकी थी। हालांकि एफएसी के नियमों में कार से दौरा करने का नियमों का जिक्र नहीं था। इसे बाद में 10 फरवरी की संतुति में जोड़ा गया। जिसे केवल मंत्री जी की आज्ञा से किया जा सकता है।

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