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हिंदी में पूछे सवाल का मराठी में मिला जवाब
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Sun, 30 Jun 2013 12:28 AM IST
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मराठी मानुष का झंडा ऊंचा करने वाले महाराष्ट्र के कुछ दलों के साथ शायद राज्य सरकार भी इस गलतफहमी में है कि वह हर सवाल का जवाब मराठी में दे सकती है।
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भले ही वह कानून के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ही क्यों न हो।
ताजा मामले में उत्तर प्रदेश निवासी आरटीआई कार्यकर्ता को उनके हिंदी में भेजे सवाल का जवाब मराठी में मिला है, जो उनकी समझ से परे है।
आरटीआई अधिनियम के तहत सूचनाएं अंग्रेजी और हिंदी दोनों ही भाषाओं में मांगी जा सकती है। क्षेत्रीय भाषा का उपयोग राज्य सरकारें तभी कर सकती हैं, जब उस भाषा में सूचना मांगी गई हो।
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हाल ही में शीर्षस्थ अदालत ने एक मामले में स्पष्ट किया था कि भाषा आधारित दक्षता न होने पर आम जनता को किसी राज्य में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
लेकिन महाराष्ट्र सरकार की ओर से आरटीआई के जवाब मराठी में भेजे जा रहे हैं।
हाथरस निवासी अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने महाराष्ट्र के पर्यटन विभाग को आरटीआई भेजी थी, जिसमें पर्यटन के विकास, विदेशी-देशी सैलानियों की आवाजाही से संबंधित सूचनाएं मांगी गई थी।
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जवाब में उन्हें मराठी में सूचनाएं दी गईं। अन्य आरटीआई कार्यकर्ताओं से बातचीत करने पर उन्हें पता लगा कि महाराष्ट्र सरकार सभी जवाब मराठी में ही दे रही है।
अग्रवाल ने राज्य सरकार के इस रवैये के खिलाफ सीआईसी में अपील करने का निर्णय लिया है।
आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के जवाब में मराठी के अलावा विकास कार्यों की सूचनाओं से संबंधित जानकारी संलग्न पन्नों पर अंग्रेजी में दी गई है, लेकिन सूचना अधिकारी ने विभाग के लैटरहेड पर मराठी में क्या लिखा है, वह उनके लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।