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सियासी दलों के नाम पर चुनाव आयोग ने भी खड़े किए हाथ
नई दिल्ली/अमर उजाला
Updated Wed, 21 Aug 2013 01:10 PM IST
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एक तरफ राजनीतिक दल सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत नहीं आना चाहते, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें अपने सभी दरवाजे खोलने होंगे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने भी उनसे जुड़ी जानकारी मांगने पर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि अब चुनाव आयोग भी राजनीति पार्टियों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना को उपलब्ध नहीं करा रहा है। चुनाव आयोग ने अपने भेजे जवाब में लिखा है कि उसके पास इस विषय में जानकारी नहीं है।
आज से कर सकेंगे आरटीआई के लिए ऑनलाइन आवेदन
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अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने छह राजनीतिक दल- समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, जनता दल यूनाइटेड और शिरोमणि अकाली दल को जमीन आवंटन को लेकर जानकारी मांगी थी। साथ ही इन पार्टियों को पांच अंकों में मिलने वाले बाहरी चंदे पर भी सवाल किया गया था।
निशाने पर RTI एक्टिविस्ट
उन्होंने 3 जून, 2013 को अपनी आरटीआई चुनाव आयोग को भेजी थी। उन्होंने बताया कि छह राजनीतिक पार्टियों को पिछले तीन वर्षों के दौरान किन लोगों ने 15,000-20,000 रुपये का फंड दान किया है। इस बात की जानकारी मांगी गई थी।
'RTI जनता के लिए वरदान तो दलों के लिए अभिशाप क्यों?'
अग्रवाल ने बताया कि महत्वपूर्ण सूचनाएं न देकर आरटीआई कानून कमजोर बनाया जा रहा है। अभी आरटीआई कानून को लागू हुए सात साल हुए हैं। असरदार साबित होने वाले इस कानून को खत्म किया जा रहा है।
यूपीए-2 पहले ही आरटीआई कानून में संशोधन करने की कोशिश में लगी हुई है, जिसके चलते सभी राजीनितक पार्टियों आरटीआई के तहत आम जनता को सूचना देने से बच जाएंगी।
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इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि अब चुनाव आयोग भी राजनीति पार्टियों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना को उपलब्ध नहीं करा रहा है। चुनाव आयोग ने अपने भेजे जवाब में लिखा है कि उसके पास इस विषय में जानकारी नहीं है।
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अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने छह राजनीतिक दल- समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, जनता दल यूनाइटेड और शिरोमणि अकाली दल को जमीन आवंटन को लेकर जानकारी मांगी थी। साथ ही इन पार्टियों को पांच अंकों में मिलने वाले बाहरी चंदे पर भी सवाल किया गया था।
निशाने पर RTI एक्टिविस्ट
उन्होंने 3 जून, 2013 को अपनी आरटीआई चुनाव आयोग को भेजी थी। उन्होंने बताया कि छह राजनीतिक पार्टियों को पिछले तीन वर्षों के दौरान किन लोगों ने 15,000-20,000 रुपये का फंड दान किया है। इस बात की जानकारी मांगी गई थी।
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अग्रवाल ने बताया कि महत्वपूर्ण सूचनाएं न देकर आरटीआई कानून कमजोर बनाया जा रहा है। अभी आरटीआई कानून को लागू हुए सात साल हुए हैं। असरदार साबित होने वाले इस कानून को खत्म किया जा रहा है।
यूपीए-2 पहले ही आरटीआई कानून में संशोधन करने की कोशिश में लगी हुई है, जिसके चलते सभी राजीनितक पार्टियों आरटीआई के तहत आम जनता को सूचना देने से बच जाएंगी।