कुंभ से पहले कंडोम विवाद, गुस्से में आयोजक
सप्ताह भर बाद नासिक में कुंभ मेले का आयोजन होना है, हालांकि मेले के आयोजक इन दिनों मेले की तैयारियों के बजाय विवाद में उलझे हुए हैं।
ये विवाद दरअसल नासिक में इस्तेमाल होने वाले कंडोमों की संख्या का है। पिछले दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि कुंभ मेले के दौरान शहर में कंडोमों की खपत बढ़ सकती है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्घालुओं के आने की संभावना है, जिससे कंडोम की मांग बढ़ सकती है। उसकी कमी न हो इसलिए प्रशासन ने पहले से ही 5.40 लाख कंडोम का ऑर्डर दे दिया है।
हालांकि कुंभ के आयोजन से जुड़े लोग ऐसी खबरों को पढ़कर आगबबूला हैं। उनका कहना है कि कुंभ मेले में साधू-संत और श्रद्घालु आते हैं, एसे में इसे कंडोम से जोड़ना कतई स्वीकार्य नहीं हैं। खबरों के मुताबिक, प्रशासन ने जितने कंडोम मंगाए हैं, वह नासिक में हर महीने होने वाल खपत के दुगुने हैं।
कंडोम खरीद में घोटाले का आरोप
इंडिया टुडे से बातचीत में नासिक के महंत सुधीरदास ने कहा कि कंडोम के प्रयोग को लेकर लोगों को जागरूक करने में कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन ये कुंभ के नाम पर कतई नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने से उन लाखों श्रद्घालुओं को ठेस पहुंचेगी, जो कुंभ में स्नान के लिए आते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने कुंभ मेले को ध्यान में रखकर बड़ी संख्या में कंडोम मंगाया है, उन्हें ये पता ही नहीं कि कुंभ संयम का पर्व होता है। उस समय यौनसंबंधों से दूर रहना केवल अनिवार्य होता है।
सुधीरदास ने कंडोमों की खरीद में घोटाले तक का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन में इतनी अधिक मात्रा में कंडोम खरीदने की क्या जरूरत है, जिसमें इसके खपत की बहुत कम संभावना है।
प्रशासन ने कहा गैरजरूरी है ये विवाद
वहीं नासिक के लिए कंडोम खरीदने वाले महाराष्ट्र स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने कहा कि कंडोम खरीद पर हो रहा विवाद गैर जरूरी है।
सोसाइटी के प्रोजेक्ट ऑफिसर कुशर सिंह परदेशी ने कहा कि कुंभ में 5.40 कंडोम मंगाने की खबर सही नहीं है। नासिक को 2.60 लाख कंडोमों की आपूर्ति की गई है, जो सामान्य है। और इसका कुंभ से कोई लेनादेना नहीं है।