गैंगरेप पीड़िता को सिंगापुर भेजने पर सवालिया निशान

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 28 Dec 2012 10:18 AM IST
rape survivor airlift was govt not medical decision
दिल्ली में चलती बस में गैंग रेप की शिकार 23 वर्षीय छात्रा को अचानक सफदरजंग अस्पताल से सिंगापुर के अस्पताल में शिफ्ट कर दिए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं। जब पीड़िता का इलाज करने में सफदरजंग के डॉक्टर सक्षम थे तब अचानक से इस फैसले का राज लोगों को चौंका रहा है, वहीं दिल्ली के डॉक्टरों ने सरकार के फैसले को आड़े हाथों लिया है।

सवाल यह है कि क्या गैंग रेप पीड़िता को सफदरजंग हॉस्पिटल से सिंगापुर शिफ्ट करने का फैसला राजनीतिक फैसला था? क्योंकि डॉक्टरों के अनुसार गैंग रेप पीड़िता के इलाज को लेकर सरकार मेडिकल तर्कों से ज्यादा सियासी फार्मूलों को इस्तेमाल करने में लगी रही।  

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार जब रेप पीड़िता को सिंगापुर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया तो इलाज कर रहे डॉक्टरों से बस इतना पूछा गया कि क्या पीड़िता सिंगापुर जाने की स्थिति में है? सरकार ने इलाज कर रहे डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम से यह नहीं पूछा कि सिंगापुर शिफ्ट किया जाए या नहीं? या फिर वहां दिल्ली से बेहतर किस मामले में इलाज होगा।

अखबार के अनुसार पीड़िता को सिंगापुर भेजने का निर्णय डॉक्टरों का नहीं था, बल्कि सरकार की तरफ से लिया गया फैसला है। अखबार ने एक डॉक्टर समीरन नंदी के हवाले से लिखा है कि जब पीड़िता खून से लथपथ थी, उसकी हालत बेहद नाजुक थी और उसे कई दिनों से वेंटिलेटर पर रखा जा रहा था तब ऐसे हालात में उसे सिंगापुर भेजना वाकई में संदेहास्पद है।

एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि जब प्रधानमंत्री का यहां ऑपरेशन और इलाज हो सकता है तो फिर एक मरीज को सिंगापुर भेजने की क्या जरूरत थी। एम्स के जेपीएन ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि सरकार के निर्देश और छात्रा के हित को ध्यान में रखकर पीड़िता को सिंगापुर भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। 

अगर हम इस घटना के बाद दिल्ली की हलचलों पर नजर डालें तो इसमें सीधे-सीधे राजनीति दिखाई दे रही है। एक तरफ तो कॉंस्टेबल की मौत के मामले में तेजी से गिरफ्तारियां हो रही हैं और पुलिस भी काफी चुस्त दिख रही है तो वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर या इंडिया गेट पर होने वाले प्रदर्शनों का दौर भी फीका पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद से उनकी संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। सरकार ने मीडिया को भी ऐसे प्रदर्शनों को कम दिखाने की सलाह दे डाली है।

ऐसे में जब पीड़िता को गुपचुप तरीके से सिंगापुर भेजे जाने पर नजर डालें तो वाकई में कुछ 'संदेहास्पद' तो दिख रहा है और यह भी दिख रहा है कि इसके पीछे सरकार की मंशा क्या हो सकती है? सरकार पीड़िता की तरफ से लोगों के ध्यान को हटाना चाहती है, जिससे देशभर में लोगों के गुस्से और प्रदर्शनों में कमी आ जाए। दिल्ली में पीड़िता के रखने पर उसके बिगड़ते स्वास्‍थ्य की पल-पल मिलने वाली खबर से जहां लोगों में गुस्सा बढ़ रहा था वहीं सरकार की सांसे भी फूल रही थी। 

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