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सावधान! बारिश में भीगने का प्लान है तो बदल दीजिए
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2013 08:19 PM IST
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घुमड़ते बादलों को देख भीगने की योजना बनाने की जरूरत नहीं है। शुरुआती बारिश सेहत पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय वातावरण में प्रदूषक तत्वों की भरमार है।
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इनमें से ज्यादातर पानी में घुलनशील होते हैं। इसी वजह से शुरू की बारिश का पानी प्रदूषित हो जाता है।
टेरी के पर्यावरण वैज्ञानिक सुमित शर्मा के मुताबिक, वातावरण में फिलहाल नाइट्रोजन व सल्फर के आक्साइड्स व हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषक तत्वों की अधिकता है।
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राजधानी की आबोहवा में नाइट्रोजन आक्साइड का वार्षिक सांद्रण 60 माइक्रोग्राम/ घन मीटर रहता है। जबकि मानक 40 माइक्रोग्राम/ घन मीटर है। इससे शुरुआती बारिश का पानी अम्लीय हो जाता है।
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कई बार इसकी पीएच वैल्यू 5.5 से नीचे चली जाती है। तीन दिन की तेज बारिश के बाद ही हालात सामान्य हो पाते हैं।
वहीं, जीटीबी के चिकित्सक डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि शुरुआती बारिश में भीगने का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है।
इस दौरान शरीर पर फफोले पड़ना, जगह-जगह लाल चकत्ते पड़ जाना व खुजली जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।