फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   new telangana state where will go

किस राह और कौन सी मंजिल पर पहुंचेगा तेलंगाना

Wed, 31 Jul 2013 01:59 AM IST
नई दिल्ली/संजय मिश्र
नई दिल्ली/संजय मिश्र Updated Wed, 31 Jul 2013 01:59 AM IST
विज्ञापन
new telangana state where will go

तेलंगाना का देश के 29वें राज्य के रूप में उदय का रास्ता साफ हो चुका है। सवाल है कि सियासी मजबूरी के कारण अवतरित होने जा रहा एक और राज्य अपने लिए कौन सा रास्ता और मंजिल चुनेगा?

विज्ञापन


भले ही छोटे राज्यों को विकास और सुशासन की गारंटी माना जाता हो। नए राज्य का गठन करते समय राजनीतिक दल ऐसी दलील देते अघाते न हों। मगर हकीकत इसके ठीक उलट है।
विज्ञापन


लगभग 13 साल पहले देश के मानचित्र पर आए तीन राज्यों झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ की वर्तमान स्थिति इस राजनीतिक दलील को मुंह चिढ़ाती प्रतीत होती है।

अपनी अलग तासीर के कारण अगर उत्तराखंड को किनारे कर दें तो झारखंड और छत्तीसगढ़ विकास और सुशासन की गारंटी की कसौटी पर खरे उतरते नहीं दिखते।

पढ़ें, बंटेगा आंध्र, बनेगा तेलंगाना, हैदराबाद साझा राजधानी
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्तमान में झारखंड जहां पूरी तरह से अराजकता का शिकार हो गया है। वहीं छत्तीसगढ़ तमाम दावों के बावजूद नक्सलियों का सबसे बड़ा गढ़ बन गया है। प्रदेश में राजनीतिक नेतृत्व के नाम पर इन राज्यों में काबिल नई पौध अब तक सामने आती नहीं दिख रही।

तेलंगाना के गठन के बारे में भी वही तर्क दिए जा रहे हैं जो इससे पहले तीन राज्यों के गठन के समय दिए गए थे।

पढ़ें, तेलंगाना राज्यः अब तक का सफरनामा


मगर तब भी हकीकत राजनीतिक हित साधने की थी और अब भी। तब की राजग सरकार की अगुवाई कर रही भाजपा को नए राज्य के गठन से सियासी फायदा साफ दिख रहा था।

पार्टी संयुक्त बिहार के झारखंड, संयुक्त उत्तर प्रदेश के उत्तराखंड और संयुक्त मध्य प्रदेश के छत्तीसगढ़ इलाके में बड़ी ताकत थी। इसलिए तब नए राज्य में सरकार बनाने के मोह से इन राज्यों का जन्म हुआ था। अब तेलंगाना के मामले में भी सारा किस्सा कुछ ऐसा ही है।

फर्क सिर्फ यह है कि अब केंद्र में सरकार की अगुवाई कांग्रेस कर रही है। तेलंगाना के गठन की बात करें तो कांग्रेस के कान में तब तक जूं नहीं रेंगी, जब तक वहां वाईएसआर रेड्डी का दबदबा था।

पढ़ें, तेलंगाना राज्य: कैसी होगी गठन की प्रक्रिया?

पार्टी ने बीते लोकसभा चुनाव में राज्य की 42 में से 33 सीटों पर कब्जा जमाया था। मगर वाईएसआर की मौत और उनके पुत्र जगन मोहन रेड्डी की बगावत से बाजी पलट गई।

जगन मोहन के सामने आंध्र प्रदेश में बुरी तरह कमजोर पड़ चुकी कांग्रेस के सामने तेलंगाना का गठन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।

दरअसल पार्टी नेतृत्व ने इस फैसले के जरिए पूरा आंध्र प्रदेश गंवाने के बदले तेलंगाना में अपनी राजनीतिक हैसियत बचाने के लिए ही नए राज्य का दांव खेला है।

उल्लेखनीय होगा कि नए तेलंगाना राज्य में लोकसभा की 17 सीटें होंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed