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100 साल पुरानी तस्वीर का जादू

Wed, 13 Aug 2014 12:26 PM IST
Updated Wed, 13 Aug 2014 12:26 PM IST
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इन दिनों प्रथम विश्व युद्ध की शताब्दी मनाई जा रही है। सिंगापुर बग़ावत पर दस्तावेज़ी फ़िल्म बनाने का विचार आया तो पहुंच गया हरियाणा में भिवानी ज़िले के गुजरानी।

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वहां के लोगों को सिंगापुर बग़ावत के बारे में कुछ ठोस पता नहीं था, लेकिन मेरे पास कुछ तस्वीरें थी और इन तस्वीरों ने अपना असर दिखाया।

गुजरानी के नंबरदार अत्तर सिंह ने अचानक क्लिक करें एक तस्वीर देखी और देखते ही रह गये। इस तस्वीर में उन के घर का कोई नहीं था न कोई जान-पहचान का शख़्स शामिल था।
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तस्वीर में कुछ लोग एक दीवार के साथ खड़े किए गए हैं और फायरिंग स्क्वॉड उन पर गोली चला रहा है।

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इस तस्वीर का जिक़्र पहली बार

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हरियाणा के भिवानी ज़िले के इस गांव में इस तस्वीर का जिक़्र पहली बार हुआ था।

गुजरानी में अत्तर सिंह का परिवार 1947 में पाकिस्तान से उजड़कर आया था और यह तस्वीर 1915 की थी। सिंगापुर बग़ावत पर पूरे सौ साल बाद दस्तावेज़ी फ़िल्म बनाने का विचार आया तो तय किया कि इस बग़ावत सी जुड़ी यादें ढूंढ़ेंगे और अभी तक इसे लेकर जो इतिहास लिखा गया है उस पर सवाल करेंगे।

लगा कि बाग़ियों का कोई नाती-पोता मिल जाएगा। मगर बाग़ी मुसलमान थे इसलिए शक था कि उनके नाती-पोते पाकिस्तान चले गए होंगे।

गुजरानी समेत सभी गांव हिंदू आबादी के हैं और 1947 में दुबारा बसे हैं। जिन गांवों का इतिहास है अगर उन गांव वालों को बताया जाए तो वे क्या कहेंगे? गुजरानी में एक व्यक्ति से सिंगापुर बग़ावत के बारे में पूछा, तो उसने किसी और की तरफ़ इशारा करके कहा कि उसको पता होगा।

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तस्वीर का जादू

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दूसरे शख़्स ने से पूछा तो उसने किसी और की तरफ इशारा करके कहा कि वो उम्र में बड़ा है, उसे पता होगा। उससे पूछा तो उसने कह दिया कि फ़लां व्यक्ति ज़्यादा पढ़ा हुआ है उसे पता होगा।

हमने उन्हें एक पुराना लेख दिखाया जो सिंगापुर बग़ावत की तस्वीर के बारे में लिखा गया था। इस तस्वीर को देखते ही उन लोगों ने तस्वीर वालों को अपना मान लिया। उनकी बातों में मरने वालों के लिए दुख और उनके किए पर गर्व शामिल था।

हमें अंदाज़ा नहीं था कि तस्वीर गांव वालों को इस हद तक झकझोर सकती है। तस्वीर की मांग हुई। गुजरानी के नंबरदार अत्तर सिंह तस्वीर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।

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गांव पर गर्व

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संजीव कुमार ने कहा कि अब तक तो वह सोचते थे कि यह मुसलमानों का गांव था और वह उन्हीं के खाली किए घरों में रहते हैं। "अब हमें गर्व है कि हम देशभक्तों के गांव में रहते हैं।"

उन्होंने कहा कि अगर इस गांव को छोड़कर जाने वालों का कोई नाती-पोता मिले तो उन्हें बताना कि हमने उनके गांव और घरों को संभाल कर रखा है।

तस्वीर ने जो जादू गुजरानी में अत्तर सिंह पर किया था तकरीबन वैसा ही चांग के भरथु, जमालपुर के नौरंग और शेर सिंह, बैंसी के दलजीत और बसंत लाल, बलियाली के सूबेदार राम चन्दर और गोबिंद राम पर हुआ।

सभी अपने-अपने गांव के इतिहास को जानकर बहुत उत्साहित हुए। अत्तर सिंह की हाथ में पकड़ी तस्वीर उनकी भावनाओं को पेश करने के साथ-साथ इतिहासकारों पर सवाल भी कर रही थी।

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