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वोटरों पर कितना चला मोदी का जादू?

Sat, 07 Dec 2013 08:37 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, दिल्ली
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 07 Dec 2013 08:37 AM IST
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modi's magic depends on assembly election results

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के एक्टिज पोल में कांग्रेस पर बढ़त दिखाए जाने के बावजूद भाजपा नतीजों को लेकर बेहद सतर्क है।

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संसद के मानसून सत्र के दो दिन बीत जाने के बावजूद पार्टी ने इन चुनावों को लेकर अपनी तरफ से कोई बड़बोला दावा नहीं किया है, क्योंकि भाजपा भी मानती है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और लोकसभा की चुनावी जंग का दारोमदार अब पांच राज्यों के चुनाव नतीजों पर टिका है। साफ है कि अब चुनाव नतीजे ही मोदी की लोकप्रियता के गुब्बारे की हवा का पैमाना तय करेंगे।

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भाजपा चुनाव नतीजे आने के बाद ही आधिकारिक तौर पर अपनी बात रखेगी। वैसे बूथ स्तर से मिल रही रिपोर्टों से पार्टी नेतृत्व दिल्ली के साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ को लेकर आश्वस्त है।
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पार्टी वाररूम को मिल रही रिपोर्टें भी उत्साहजनक हैं। इसके बावजूद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को पार्टी महासचिवों की बैठक में चुनाव पर हुई चर्चा में तय किया गया कि रविवार तक ‘वेट एंड वाच’ की नीति पर चला जाए, क्योंकि इस बार भारी मतदान के बाद नतीजों को लेकर कई तरह के आकलन सामने आ रहे हैं।

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इन चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रही भाजपा भी जानती है कि लोकसभा चुनाव के लिए उसके ‘महारथी’ मोदी की लोकप्रियता के गुब्बारे का फूलना इन चुनाव के नतीजों पर टिका है। यदि नतीजे पक्ष में आए तो मोदी की लोकप्रियता के गुब्बारे का आकार और बढ़ता चला जाएगा, अन्यथा गुब्बारे की हवा निकलने में देर नहीं लगेगी।

हालांकि भाजपा के वॉर रूम के इंचार्ज मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि असली लड़ाई लोकसभा के लिए होनी है। इसलिए भाजपा अति उत्साह व अति आत्मविश्वास में इस लड़ाई को कमजोर नहीं करना चाहती है।

दरअसल, भाजपा ने एक्जिट पोल को लेकर इसलिए भी ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया है, क्योंकि कई बार नतीजे इनके उलट भी रहे हैं। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है, ऐसे में एक्जिट पोल पर बड़बोले बयान देकर भाजपा अपनी फजीहत नहीं कराना चाहती है।

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