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अभी तक नहीं पूरा हुआ मोदी का सपना, लगेगा और समय

Thu, 27 Aug 2015 08:37 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 27 Aug 2015 08:37 PM IST
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Modi's dream is not yet completed , it will take more time

अगर आप मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट खोलते है तो सबसे पहले आपको सूचना मिलती है कि स्वच्छ विद्यालय योजना के तहत स्कूलों में बनाने जाने वाली सभी शौचालयों को बनाने का लक्ष्य पूरा कर दिया है।

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मगर कई राज्यों के स्कूलों में अभी भी कई शौचालय अस्थाई तौर पर काम कर रहे हैं। मंत्रालय ने इन राज्यों को अब 20 सितंबर की नई समय सीमा दी है। मंत्रालय ने इन राज्यों को 20 सिंतंबर तक स्कूलों के टॉयलेटों के लिए स्थाई ढांचागत सुविधा देने के लिए कहा गया है।
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सबसे ज्यादा अस्थाई टॉयलेट उड़ीसा, जम्मू कश्मीर और झारखंड में बने हैं। ज्यादातर ये टॉयलेट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ओर से बनाए गए थे। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से राज्यों के शिक्षा सचिवों के साथ बैठक ली गई थी।

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नहीं हुआ काम!

Modi's dream is not yet completed , it will take more time

बैठक में यह मुद्दा उठा कि कई राज्यों ने अस्थाई टॉयलेट बनाकर ही स्कूलों में शत प्रतिशत टॉयलेट बनाने का आंकड़ा पूरा कर लिया। कई शौचालयों में बुनियादी और ढांचागत सुविधाओं के अभाव के चलते इन शौचालयों को अस्थाई माना गया।

कई शौचालयों के काम नहीं करने की भी बात सामने आई। मंत्रालय ने इन राज्यों के अधिकारियों को कहा कि वे स्थाई शौचालयों को तैयार करें। वहीं राज्यों ने बताया कि ज्यादातर अस्थाई टॉयलेट पीएसयू की ओर से बनाए गए हैं।

उड़ीसा में छह हजार से ज्यादा, जम्मू कश्मीर में 400 के करीब तो झारखंड में 200 से ज्यादा टॉयलेट अस्थाई हैं। दस से 12 राज्यों में अस्थाई टॉयलेट हैं।

नहीं है पैसा!

Modi's dream is not yet completed , it will take more time

एक राज्य के अधिकारी ने बताया कि फंड की कमी की वजह के चलते अस्थाई टॉयलेटों को स्थाई तौर पर बदला नहीं गया। यह मुद्दा बैठक में भी उठा।

राज्यों ने कहा कि उनके पास शौचालयों के रखरखाव के लिए पैसा नहीं है तो मंत्रालय की ओर से कहा गया कि हमनें इसके लिए हर जिलों को पांच लाख रूपए आवंटित कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से कहा था कि 2.61 स्कूलों में सवा चार करेड़ टॉयलेटों का निर्माण करना था जो करीब करीब पूरा हो गया है। वहीं मंत्रालय शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने का दावा करता है।

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