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मोदी सरकार ने रोके मिड डे मील के अच्छे दिन

Sat, 19 Jul 2014 10:51 AM IST
Updated Sat, 19 Jul 2014 10:51 AM IST
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modi govt stopped proposal of mid day meal

देश में गरीबों और आम आदमी के अच्छे दिनों के वादे के दम पर सत्ता में आई मोदी सरकार ने स्कूली बच्चों को दोपहर का भोजन मुहैया कराने वाली सबसे लोकप्रिय योजना के अच्छे दिन के प्रस्ताव पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है।

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मिड डे मील योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाने का काम कर रहे करीब 28 लाख रसोइयों के वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव को टाल दिया है।
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सिर्फ रसोइये नहीं बच्चों को स्वच्छ और अच्छा खाना परोसने के लिए इसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए भी मंत्रालय ने खाना पकाने की लागत बढ़ाने के साथ ही परिवहन और बर्तनों के खर्च को बढ़ाने का प्रस्ताव किया था, मगर मोदी सरकार ने इस पूरे प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया है।

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रसोइयों को मिलता है एक हजार रुपए वेतन

modi govt stopped proposal of mid day meal

कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने 9 जुलाई की बैठक में मिड डे मील योजना के संबंध में मंत्रालय की ओर से दिए प्रस्ताव को टाल दिया।

मंत्रालय की व्यय एवं वित्त समिति ने पिछले साल सिफारिश की थी कि योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों के वेतन को एक हजार रुपए से बढ़ाकर दो हजार रुपए कर दिया जाए।

अभी रसोइयों को साल में सिर्फ दस महीने के लिए ही एक हजार रुपए मीलते है, जबकि समिति ने 12 महीने के लिए 2,000 रुपये देने की सिफारिश की थी।

रसोइयों में 80 फीसदी महिलाएं

modi govt stopped proposal of mid day meal

सूत्रों के अनुसार योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों में 80 फीसदी महिलाएं हैं। पिछली सरकार के समय भी मंत्रालय ने इसका प्रस्ताव किया था। मगर चुनाव आचार संहिता के चलते इस प्रस्ताव को रोक दिया गया था।

स्कूली बच्चों और रसोइयों से जुड़े जनहित के मामले के चलते चुनाव आयोग ने इसे लागू करने की मंजूरी दे दी थी। फिर भी यूपीए सरकार ने इसे लागू नहीं किया।

नई सरकार बनने के बाद मंत्रालय ने दोबारा इस संबंध में समिति की सिफारिशों का प्रस्ताव रखा जिसे सीसीआईए ने टाल दिया। मिड डे मील के लिए समिति ने खाना पकाने की लागत को मिड डे मील मूल्य सूचकांक के आधार पर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।

हैरानी इस बात पर है कि योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत मिड डे मील के लिए 90 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जिसमें से 80 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद सरकार ने मिड डे मील योजना को मजबूत करने के प्रस्ताव को रोक दिया है।

मिड में मील में मीली छिपकली, 33 बच्चे बीमार

modi govt stopped proposal of mid day meal

स्कूलों में दिए जाने वाले मिड डे मील को खाकर बच्चों के बीमार पड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिहार के वैशाली जिले में शुक्रवार को एक ऐसी ही घटना में मिड डे मील में छिपकली मीलने की बात सामने आई जिसे खाकर 33 बच्चे बीमार पड़ गए।

वैशाली के डीएम विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि यह घटना रसूलपुर गोरीगामा गांव के प्राइमरी स्कूल की है। गुंजियाल ने बताया कि बच्चे जब खाना खा चुके तो किसी ने बचे हुए खाने में छिपकली देखी जिसके थोड़ी ही देर बाद ही बच्चों ने पेट में दर्द की शिकायत की और उल्टियां करनी शुरू कर दी।

बच्चों को फौरन पास के अस्पताल ले जाया गया। जहां सभी बच्चे खतरे से बाहर बताए गए हैं।

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