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15 दिन से थी रुखसाना पर कातिलों की नजर

Fri, 30 Jan 2015 09:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 30 Jan 2015 09:02 AM IST
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merrut murder planning.

मेरठ में लिसाड़ीगेट के सुहेल गार्डन में हुए सामूहिक हत्याकांड की प्लानिंग 15 दिन पहले बनी थी। इसके बाद से कातिल रुखसाना के ठिकानों पर लगातार नजर रखे थे। रविवार रात को मौका पाकर इस नरसंहार को अंजाम दिया गया। पुलिस अफसरों का कहना है कि प्रॉपर्टी और प्रेम प्रसंग दोनों को जोड़कर जांच की जा रही है। केस की गुत्थी नामजद आरोपी साकिब की गिरफ्तारी के बाद ही सुलझेगी। बुधवार को उसकी तलाश में खतौली, मुजफ्फरनगर, दिल्ली और हरिद्वार में आठ पुलिस टीमों ने दबिश दी। लेकिन 72 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ है। शक के घेरे में कुछ प्रॉपर्टी डीलर भी हैं, जिनका सत्यापन कराया जा रहा है।

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यह नरसंहार 25 जनवरी की रात को हुआ था। इसमें रुखसाना उसकी तीन बेटियों रिमसा (17), चांदनी (8) खुशी (5) और बेटे सुहैब (10) के अलावा तथाकथित प्रेमी किठौर निवासी शाद की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। रुखसाना पत्नी नवेद पूर्व चेयरमैन शराफत अली की पुत्रवधू थी। इस हत्याकांड की जानकारी 26 जनवरी की सुबह हो पाई थी। मंगलवार रात तक जांच करोड़ों की प्रॉपर्टी को लेकर भाइयों में चल रही रंजिश या प्रेम प्रसंग पर आकर ठहर गई थी।
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बुधवार को नया तथ्य यह सामने आया कि इस नरसंहार के पीछे प्रॉपर्टी और प्रेम प्रसंग दोनों ही कारण हो सकते हैं। पुलिस अफसरों के अनुसार जांच में कुछ नई बातें सामने आई हैं जिसके आधार पर माना जा रहा है कि रुखसाना अपनी जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही थी, लेकिन यह खतरा उसे उसके पति नवेद के भाई साकिब से था या फिर किसी और से, अभी इसकी पुष्टि होना जरूरी है। यह भी संभव है कि इस सामूहिक हत्याकांड की वजह रुखसाना या उसकी बड़ी बेटी से जुड़े कुछ स्थानीय कारण भी हों, जिसमें साकिब भी शामिल हो गया हो।
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इसकी पुष्टि के लिए बुधवार को पुलिस ने सुहेल गार्डन पहुंचकर मौका-ए-वारदात का दोबारा निरीक्षण किया। आसपास के लोगों से भी नये सिरे से पूछताछ की गई। बताया गया कि जांच में कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के नाम सामने आए हैं, जिनका जुड़ाव रुखसाना के परिवार से होना माना जा रहा है। आईजी जोन आलोक शर्मा का कहना है कि इस केस की अहम कड़ी साकिब है, जिसकी गिरफ्तारी बेहद जरूरी है। उसका फरार होना कई संदेह पैदा कर रहा है।

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जिंदगी बचाने की रही जद्दोजहद

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जानकारी के अनुसार रुखसाना को परिवार सहित खत्म करने के लिए कातिल 15 दिनों से ताक में थे। इसके लिए रुखसाना को सुनियोजित तरीके से किराए के घरों से निकलवाया जा रहा था। वारदात से तीन दिन पहले रुखसाना को शहजाद गार्डन स्थित किराए के मकान से निकाल दिया गया था। इन तीन दिनों के अंतराल में रुखसाना जहां भी कमरा लेने जाती, उसे भगा दिया जाता।

सुहेल गार्डन कॉलोनी के लोगों ने बताया कि रुखसाना जेठ से जान का खतरा जताते हुऐ लोगों से किराए पर कमरा देने के लिए गिड़गिड़ाती थी। लेकिन लोग अपने कदम पीछे खींच लेते थे। इन तीन दिनों की जद्दोजहद में उसे कुछ ऐसे लोग भी मिले, जिन्होंने उसे शरण दी। शनिवार को उसे सुहेल गार्डन में सिर छुपाने के लिए 1010 की कोठरी मिली थी। यही उसके लिए मौत का सबब बन गई।

पुलिस का दामन भी साफ नहीं

रुखसाना ने करीब दो हफ्ते पहले लिसाडीगेट क्षेत्र की समर गार्डन चौकी पहुंचकर एक सिपाही के सामने जेठ का दुखड़ा रोया था। सिपाही ने रुखसाना को लिसाडीगेट थाने जाने को कह दिया था। पड़ोस की एक महिला ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते रुखसाना थाने जाने से डरती रही। उसे पता था कि पुलिस वालों के पास जाऊंगी तो रुपयों की जरूरत पड़ेगी। शायद अगर वह सिपाही रुखसाना की बात को गंभीरता से ले लेता तो यह सामूहिक हत्याकांड बच सकता था।

नरसंहार के आरोपियों की तलाश में दबिश

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मेरठ में महिला और बच्चों समेत छह लोगों की नृशंस हत्या कांड में नामजद महिला के जेठ साकिब अली उर्फ बांके की तलाश में पुलिस ने कई स्थानों पर दबिश दी, मगर वह हाथ नहीं लग सका। पुलिस ने देवीदास निवासी उसके एक नजदीकी दोस्त को पकड़ कर थाने बैठाया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। क्राइम ब्रांच के अलावा मेरठ पुलिस भी खतौली में ही डेरा डाले हुए है।

खतौली के पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. शराफत अली के बेटे नवेद उर्फ राजू की पत्नी रुखसाना, उसके पुत्र सुहेल तथा पुत्रियां रिमशा, चांदनी, खुशी के अलावा एक परिचित की रविवार रात्रि में मेरठ में गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में परिजनों ने मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें नवेद के बडे़ भाई भाकियू के पूर्व नगर अध्यक्ष साकिब अली उर्फ बांके पर शक जाहिर कर नामजद कराया है।

साकिब अली और नवेद के बीच दयालपुरम की करीब दस करोड़ की कोठी को लेकर विवाद चल रहा है। इसी के चलते बांके ने नवेद के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें नवेद करीब ढाई साल से जेल में बंद है। रुखसाना के भाई सोनी और गयूर खतौली ग्रामीण के इस्लामाबाद में रहते हैं। मंगलवार को रुखसाना और चारों बच्चों के शवों को यहीं पर लाकर जानसठ रोड के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। कोर्ट से नवेद को भी तीन घंटे का पेरोल मिला था।

पूरी रात्रि की गई छापेमारी

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खतौली पुलिस ने मेरठ पुलिस, क्राइम ब्रांच के साथ मंगलवार रात्रि में भी दयालपुरम, सराफान, काजियान, देवीदास, नई आबादी में साकिब अली बांके की तलाश में छापेमारी की, मगर वह हाथ नहीं लग सका। मेरठ पुलिस अभी यहीं पर डेरा डाले हुए है।

परिचित भी भूमिगत हुए
भाकियू के पूर्व नगर अध्यक्ष साकिब अली बांके की मेरठ के नरसंहार कांड में नामजदगी होने पर वह तो फरार ही है, उसके परिचित और रिश्तेदार भी भूमिगत हो गए हैं। हालांकि पुलिस ने भागदौड़ करके देवीदास निवासी उसके एक नजदीकी को दबोच लिया है, ताकि बांके की टोह ले सकें । उसके दोस्त की धरपकड़ होते ही अन्य परिचित भी भूमिगत हो गए तथा खतौली छोड़ कर फरार हो गए हैं।

सर्विलांस के जरिए टोह जारी
पुलिस सर्विलांस के जरिए भी बांके की तलाश में लगी है। पुलिस ने उसके और रिश्तेदारों के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर ले लिया है, ताकि इनकी लोकेशन की जानकारी मिल सके।

परिजनों ने भी चुप्पी साधी
खतौली। इस नरसंहार की वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है। हालांकि पुलिस कई बिंदुओं को अपनी जांच में लेकर चल रही है, ताकि वारदात का खुलासा हो सके, जिसमें दयालपुरम की कोठी और अन्य संपत्ति को लेकर दोनों भाइयों बांके और नवेद के बीच चल रही रंजिश भी शामिल है। पूर्व चेयरमैन की तीन पत्नी का भरा पूरा परिवार है, जो शराफत कालोनी में रहता है, ये परिजन भी इस नरसंहार के बाद चुप्पी साधे हुए है।

सुनसान पड़ी कोठी
पूर्व चेयरमैन शराफत अली की दयालपुरम की कोठी सुनसान पड़ी है। बांके के परिजन भी कहीं और चले गए हैं। पुलिस की लगातार दबिश के कारण आसपास के लोग भी कोठी के पास आने से कतरा रहे है।

भाइयों के घर पर सांत्वना देने वालों को तांता लगा रहा

मृतका रुखसाना के भाइयों इस्लामाबाद भूड़ निवासी सोनी और गयूर के मकानों पर बुधवार को भी परिचितों, रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों को तांता लगा रहा। सभी परिचित पीड़ित परिवार को सांत्वना देते रहे।

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