असम में गोगोई के खिलाफ भाजपा का महागठबंधन तैयार
बीते साल दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद भाजपा ने असम में अपनी जीत की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी ने सूबे में 15 वर्षों से जमे गोगोई सरकार को चुनौती देने के लिए 11 दलों और संगठनों का महागठबंधन तैयार किया है। महागठबंधन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी महीने के तीसरे हफ्ते होने वाली असम यात्रा के दौरान की जाएगी।
इस महागठबंधन में 10 सीटों वाली बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) समेत 9 अन्य छोटे दल और संगठन शामिल हैं। असम गण परिषद (एजीपी) से बातचीत इसके अध्यक्ष अतुल वोरा और पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल महंत के आपसी टकराव के कारण फिलहाल परवान नहीं चढ़ पाई है।
हालांकि पार्टी ने बातचीत का सिलसिला जारी रखने का फैसला किया है। उधर कांग्रेस में भाजपा के महागठबंधन से मुकाबला करने के लिए एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन पर बातचीत का सिलसिला जारी है।
अप्रैल में संभावित हैं चुनाव
भाजपा की बोडो और जनजातीय वोटों पर पकड़ बनाने की रणनीति को भांपते हुए
मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने शुक्रवार को ही बोडो कोसारी ऑटोनोमस काउंसिल का
गठन कर दिया है। असम में अप्रैल में विधानसभा चुनाव संभावित हैं।
निकाय
चुनाव में सूबे में बेहतर प्रदर्शन के बाद से ही भाजपा ने बोडो और जनजातीय
वोटों को साधने की रणनीति बनाई थी। इस क्रम में पार्टी की ओर से कभी गोगोई
के सबसे करीबी रहे हेमंत विश्वकर्मा की मदद से बीपीएफ के मुखिया हंगरामा
मोहिलरी को साधा, जिन्होंने गोगोई सरकार से दूरी बनाने के बाद बोडो को एक
मंच पर लाने की मुहिम के तहत यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) का गठन किया
था।
इस फ्रंट मे मोहिलरी ने राभा, मिसिंग, कार्बी सहित कई अन्य जनजातीय से
जुड़े संगठनों को शामिल किया था। भाजपा का राज्य की 126 में से इस फ्रंट को
30 सीटें देने पर सहमति जताने के बाद महागठबंधन का खाका तैयार हो गया।
भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पीएम 19 जनवरी को असम जा सकते हैं।