फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   jpc report blame to cag for misleading statistics

टूजी पर जांच रिपोर्ट का नतीजा ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’

Wed, 30 Oct 2013 12:48 AM IST
हरीश लखेड़ा/दिल्ली
हरीश लखेड़ा/दिल्ली Updated Wed, 30 Oct 2013 12:48 AM IST
विज्ञापन
jpc report blame to cag for misleading statistics

टूजी पर सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये की चपत लगने के मामले की जेपीसी जांच का नतीजा ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया कहावत’ को चरितार्थ कर रहा है।

विज्ञापन


संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की ढाई साल चली जांच के दौरान 57 बैठकों और 155 घंटों के मंथन बाद तैयार रिपोर्ट में भ्रामक आंकड़ेबाजी के लिए कैग को ही दोषी जिम्मेदार ठहरा दिया है।
विज्ञापन


भाजपा समेत विपक्षी दलों के असहमति पत्र के साथ तैयार जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि टूजी पर कैग ने राजकोषीय घाटा होने के जिन विशाल आंकड़ों का आकलन किया था, उससे देश की बदनामी हुई और उसे भ्रष्ट देशों की कतार में खड़ा कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस नतीजे से बिफरे भाजपा नेता व जेपीसी सदस्य रविशंकर प्रसाद ने इसे कांग्रेस की जांच रिपोर्ट करार दे दिया। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि बैठकों में जो बात कांग्रेस के मनीष तिवारी, दीपेंद्र हुड्डा आदि सदस्य कहते थे वही बातें रिपोर्ट के नतीजों में दर्ज कर दी गई।

हालांकि जेपीसी चेयरमैन पीसी चाको इस आरोप को सही नहीं मानते। मंगलवार को जांच रिपोर्ट स्पीकर मीरा कुमार को सौंपने के बाद चाको ने कैग पर ही उंगली उठा दी। उन्होंने कहा कि कैग यानीदेश की सर्वोच्च लेखा-परीक्षक संस्था को भ्रामक आंकड़े देने से बचने की जरूरत है।

चाको ने कहा कि यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि समिति तब के दूर संचार मंत्री ए राजा को तो दोषी मान चुकी है, जबकि प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री को क्लीन चिट दे चुकी है। कांग्रेस और भाजपा के रुख से साफ है कि उनकी राय आज भी वही है जो ढाई साल पहले थी। रिपोर्ट में भी यही बातें झलकती हैं।

भाजपा को सिर्फ इस बात से संतुष्टि है कि टूजी पर संसद का पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ाने के बाद देश में भ्रष्टाचार पर कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने में सफल रही। अलबत्ता, कांग्रेस इस रिपोर्ट में टूजी पर लीपापोती करने में कामयाब रही।


संसद का एक पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद मार्च 2011 में बजट सत्र में जेपीसी गठित की गई। उसे मानसून सत्र के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन उसका कार्यकाल लगातार पांच बार बढ़ाया गया। इस पर भी अंत तक जांच रिपोर्ट के नतीजों पर आमसहमति नहीं बन पाई।

समिति के 30 सदस्यों में से 16 इसके पक्ष तथा 11 विरोध में रहे। भाजपा के साथ दोस्ती टूटने के बाद जदयू भी अंत समय में मतदान से गायब हो गया था।

भाजपा, माकपा, भाकपा, बीजेडी, अन्ना द्रमुक, द्रमुक, टीएमसी के दिये असहमति पत्रों को रिपोर्ट में काटछांट कर शामिल किया गया है। चाको ने दलील दी कि ये असहमति पत्र स्पीकर के जारी दिशा-निर्देशों के तहत नियम 91(1) तथा लोकसभा की प्रक्रिया के नियम 303(5) के अनुरूप नहीं थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed