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मोदी का असर: 17 साल बाद एनडीए से जदयू हुआ अलग
पटना
Updated Sun, 16 Jun 2013 09:46 PM IST
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भाजपा की चुनावी कमान नरेंद्र मोदी के हाथ सौंपने से नाराज जदयू ने एनडीए से अलग होने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही भाजपा और जदयू की 17 साल पुरानी दोस्ती टूट गई।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शरद यादव ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री आवास पर एनडीए से अलग होने की घोषणा की।
शरद यादव ने कहा कि एक राष्ट्रीय एजेंडे के तहत हम 17 साल से एनडीए से जुड़े हुए थे। पिछले सात-आठ साल से बिहार में भी दोनों पार्टियों के बीच बेहतर तालमेल रहा।
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कहां हैं एनडीए के संकटमोचक?
गोवा में जब भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई तब भी जदयू ने कह दिया था कि एनडीए के राष्ट्रीय एजेंडे से अलग कुछ भी होता है तो भाजपा जदयू का रिश्ता आगे नहीं चल पाएगा।
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उन्होंने कहा कि भाजपा अपने किसी भी नेता को कोई जिम्मेदारी देती है तो वह उसका आंतरिक मामला है। लेकिन गोवा सम्मेलन के बाद भाजपा के महासचिव अमित शाह लखनऊ आते हैं तो कहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण उनके एजेंडे में है। उनके इस बयान से हमारा कार्यकर्ता बेचैन होता है। यह राष्ट्रीय एजेंडे से अलग है।
क्या होगा नीतीश का एजेंडा?
उन्होंने बताया कि पार्टी के सभी नेताओं और अन्य सहयोगियों की आम सहमति से एनडीए से अलग होने का निर्णय लिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय एजेंडे से अलग होने पर न उसका भला होगा न हमारा फायदा। इसलिए आज से भाजपा और जदयू के रास्ते अलग-अलग हैं।
'सिद्धांत से समौझाता नहीं'
नीतीश कुमार ने कहा कि पार्टी के नाते हमारे भी कुछ बुनियादी सिद्धांत हैं। ऐसी स्थिति आ गई कि अगर एनडीए में रहना है तो सिद्धांत से समौझाता करना होगा। लेकिन हमे यह मंजूर न था इसलिए हमने यह फैसला लिया। अब इसके परिणाम जो भी हों हमें उसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि इस टूट के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हमें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया गया है।
एनडीए से अलग होने के बाद जदयू के तीन फैसले
'मोदी धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए खतरा'
इससे पूर्व दोपहर 11:30 बजे मुख्यमंत्री आवास पर हुए कैबिनेट की बैठक में जदयू नेताओं ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक कड़ा प्रस्ताव पास किया। प्रस्ताव में एनडीए से अलग होने की वजहों को बताया गया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि मोदी एक विवादास्पद नेता हैं। उन्हें सभी धर्मों के लोग स्वीकार नहीं करते हैं। मोदी के नाम से लोगों में भय पैदा होता है। वह देश्ा के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए खतरा हैं। वह जदयू को स्वीकार्य नहीं हैं।
फिर विश्वास मत करेंगे हासिल
कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर दो बजे राज्यपाल से मुलाकात के लिए राजभवन गए। उन्होंने जदयू सरकार के समर्थन में सभी विधायकों की सूची राज्यपाल को सौंपी।
नीतीश कुमार ने बताया कि भाजपा से अलग होने के बाद कैबिनेट ने विश्वास मत हासिल करने का निर्णय लिया है। बहुमत साबित करने के लिए 19 जून को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
जल्दबाजी में लिया दुर्भाग्यजनक फैसला: शिवसेना
इधर शिव सेना ने जद-यू के एनडीए गठबंधन से अलग होने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। सेना का मानना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले का फायदा कांग्रेस को होगा।
शिव सेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, 'इस निर्णय से एनडीए को नुकसान होगा और कांग्रेस को इससे लाभ होगा। अगर मेरी पार्टी चाहेगी, तो मैं जय-यू नेता शरद यादव से बात करने का इच्छुक हूं।'
नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के बारे में राउत ने कहा कि यह भाजपा का आंतरिक मामला है। एनडीए ने अभी पीएम पद के उम्मीदवार पर कोई फैसला नहीं लिया है।
क्यों छूटा साथ
नीतीश कुमार को डर है कि नरेंद्र मोदी को एनडीए का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने से बिहार के मुस्लिम वोटर जदयू का साथ छोड़ देंगे और सारे मुस्लिम वोट राजद के खाते में चले जाएंगे।
नीतीश और अन्य जदयू नेता मानते हैं कि महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में बड़ी हार की भी यही वजह रही कि सारे मुस्लिम वोट राजद को मिले।
पार्टी में राय है कि मोदी के सवाल पर भाजपा से अलग होने पर राज्य के 14 फीसदी मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण जदयू की तरफ हो जाएगा और इन्हीं वोटों से भाजपा के सवर्ण वोटों का घाटा भी जदयू पूरा कर लेगा।
मोदी से नीतीश का पुराना बैर
--नरेंद्र मोदी की मौजूदगी के चलते तीन साल पहले नीतीश ने आडवाणी समेत वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ अपना डिनर रद्द कर दिया था।
--बिहार विधानसभा चुनावों में जदयू के ऐतराज पर भाजपा को प्रचारकों की सूची से मोदी का नाम हटाना पड़ा था।
--2010 में अखबार में छपे एक विज्ञापन में मोदी के साथ अपने फोटो को लेकर नीतीश ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी।