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इटली ने किया दुश्मनों जैसा काम: जेटली
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 14 Mar 2013 12:10 AM IST
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि अपने नौसैनिकों को भारत वापस नहीं भेजने का फैसला लेकर इटली ने दुश्मनों जैसा काम किया है।
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जेटली ने केंद्र सरकार को इटली सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा है कि अब डिप्लोमेसी को भुलाते हुए कड़े कदम उठाने का वक्त आ गया है।
वहीं माकपा के सीताराम येचुरी ने सरकार से पूछा कि आखिर क्यों हमारे देश के कानून के शिकंजे से ही बचकर ओक्तावियो क्वात्रोची और एंडरसन जैसे हाई प्रोफाइल विदेशी अभियुक्त विदेश भाग जाते हैं।
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बुधवार को हत्या के आरोपी इतालवी नौसैनिकों के भारत वापस नहीं भेजने के इटली सरकार के फैसले को लेकर राज्यसभा में विपक्ष का गुस्सा फूट पड़ा।
जेटली ने शून्यकाल में मामला उठाते हुए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने मशहूर उपन्यास जेम्स बॉंड का जिक्र करते हुए कहा कि पहली बार मौका दिया जाता है।
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दूसरी बार इत्तेफाक होता है, मगर तीसरी बार यह दुश्मनों का काम होता है। इटली ने देश की संप्रभुता को चुनौती दी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय कानून के तहत इन दोनों नौसैनिकों को क्रिसमस मनाने और वोट डालने के लिए कैसे भेजा जा सकता है।
जबकि देश के कानून के मुताबिक किसी कैदी को मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए जेल से बाहर जाने की इजाजत नहीं है।
जेटली ने बताया कि इटली के गृह मंत्रालय की खुद की अधिसूचना के अनुसार जेल में बंद व्यक्ति डाक मतों के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।
जेटली ने कहा कि सरकार को विएना समझौते की बजाय देश के संविधान को ज्यादा तवज्जो देनी चाहिए। माकपा के के एन बालगोपाल ने कहा कि जिस तरह 16 दिसंबर के गैंग रेप कांड के बाद देश में गुस्सा पनपा था।
उसी तरह केरल में भी ऐसा गुस्सा उपज रहा है। सपा नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सरकार से पूछा कि आखिर सरकार की तरफ से किन वकीलों ने इतने हल्के ढंग से पैरवी की, जिससे यह लोग अपने देश भागने में कामयाब हो गए।
यादव ने कहा कि किसी भारतीय कैदी को तो वोट डालने के लिए जेल से बाहर आने की इजाजत नहीं मिलती तो दो विदेशी नागरिकों को यह मंजूरी कैसे मिल गई। अन्नाद्रमुक सांसद मैत्रेयन ने इटली के राजदूत को गिरफ्तार करने की मांग की तो द्रमुक ने सरकार से पूछा कि चाहे श्रीलंका में तमिल लोगों का मुद्दा हो या फिर इटली नौसैनिकों का मामला हर देश भारत की संप्रभुता को इतने हल्के से कैसे ले लेता है।