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इस्कॉन मंदिर धर्मांतरण का प्रमुख केंद्र: शंकराचार्य

Mon, 08 Feb 2016 12:57 PM IST
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:57 PM IST
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ISKON temples are center of religious conversion: Shankaracharya

शंकराचार्य ने दुनिया भर में कृष्ण भक्ति और हिन्दू धर्म को नई पहचान

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दिलाने वाले अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) पर धर्मांतरण का आरोप लगाया है। हालांकि वह स्पष्ट तौर पर इसका कोई प्रमाण नहीं दे सके।

उनका कहना है कि इस्कॉन अमेरिका से रजिस्टर्ड संस्था है। भारत में जगह-जगह मंदिर बनाकर कृष्ण भक्ति और आस्था के नाम पर पैसा एकत्र करके विदेश भेजा जा रहा है। इस्कॉन कृष्ण भक्ति के जरिये हिन्दुओं को बरगलाकर उनका धर्मांतरण कराने में जुटा है। इतना ही नहीं इस्कान वृंदावन, मुंबई सहित उन्हीं शहरों में अपने पांव ज्यादा से ज्यादा पसार रहा है, जहां पहले से ही कृष्ण के भव्य परंपरागत मंदिर हैं।

उन्होंने कहा इस्कॉन झारखंड, छत्तीसगढ़, असम सहित पूर्वोंत्तर के राज्यों में नहीं जाना चाहता क्योंकि वहां पर पहले से ही ईसाई मिशनरियां बड़े पैमाने पर धर्मांतरण में जुटी हैं। किसी मझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह कोई विवादित बयान देकर हमेशा चर्चा में बने
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रहने की प्रवृत्ति और परंपरा से नाता जोड़ते हुए ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह बयान देकर नए विवाद को जन्म दिया है। पहले साईं को मुसलमान बताकर, फिर शनि पूजा को महिलाओं के लिए अमंगलकारी तथा शनि को देव नहीं ग्रह बता चुके हैं।

सिंहल के बारे में फिसली जबान

ISKON temples are center of religious conversion: Shankaracharya

वहीं इस्कॉन के अंतरराष्ट्रीय संपर्क प्रमुख ब्रजेंद्र नंदन दास ने शंकराचार्य के बयान पर हैरानगी जताते हुए इस आरोप का पूरी तरह से खंडन किया है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, धर्मांतरण जैसी बात कहना बेमानी है। इस्कॉन तो कृष्ण भक्ति का संदेश और गीता के प्रचार-प्रसार में जुटा है।

इस्कॉन पर धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए शंकराचार्य ने यह भी कह दिया कि भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुब्रह्मणयम स्वामी और अशोक सिंहल की बेटियों ने मुसलमानों से ब्याह किया है। जब उन्हें याद दिलाया गया कि अशोक सिंहल अविवाहित थे तो उन्होंने बात बदल दी।

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