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नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार को घेरा

Fri, 20 Feb 2015 07:30 PM IST
Updated Fri, 20 Feb 2015 07:30 PM IST
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I am sad that academic governance in India remains so deeply vulnerable to the opinions of the ruling government: Amartya Sen

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की एक चिट्ठी ने देश की केंद्र सरकार को एक बार फिर से कठघरे में खड़ा कर दिया है। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने नालंदा विश्वविद्यालय चांसलर (कुलाधिपति) के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल के लिए अपना नाम वापस ले लिया है। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार नहीं चाहती है कि वह नालंदा विश्वविद्यायल के कुलाधिपति के पद पर रहें।

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने विश्वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड को लिखे पत्र में कहा कि एक महीने पहले उनके नाम की सिफारिश किए जाने के बावजूद सरकार की ओर से उसका नाम सरकार की तरफ से नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तरफ से उनके नाम को मंजूरी नहीं मिल रही है।
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'मेरे कार्यकाल की समाप्ति चाहती है'

I am sad that academic governance in India remains so deeply vulnerable to the opinions of the ruling government: Amartya Sen

अमर्त्य सेन ने अपने पत्र में लिखा है कि सरकार की तरफ से इस मामले में कार्रवाई न करना गवर्निंग बोर्ड के फैसले को पलटने का एक तरीका है जिसपर समय बर्बाद किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जुलाई के बाद नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के तौर पर मेरे कार्यकाल की समाप्ति चाहती है और तकनीकी तौर पर उसे करने का ऐसा कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि इसलिए मैंने फैसला किया है कि मुझे जुलाई के बाद भी इस पद पर बनाए रखने की सर्वसम्मत सिफारिश और गवर्निंग बोर्ड के अनुरोध के बावजूद नालंदा विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए मेरे नाम को हटा लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि सरकार की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बोर्ड के सर्वसम्मत चयन पर अपनी संस्तुति देने की स्थिति में नहीं हैं।

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