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आगरा: हिंदू परिवारों को ईसाई बनाने का हल्ला

Mon, 22 Dec 2014 02:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, एत्मादपुर (आगरा)
ब्यूरो/अमर उजाला, एत्मादपुर (आगरा) Updated Mon, 22 Dec 2014 02:18 PM IST
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Pother over Hindus being converted to Christians in Agra

वेद नगर में धर्मांतरण का मुद्दा ठंडा भी न पड़ा था कि रविवार को एत्मादपुर तहसील के गांव गढ़ी संपत में 20 हिंदू परिवारों को ईसाई बना दिए जाने का हल्ला मचा। घर के पुरुषों को बताए बिना महिलाओं का टूंडला की प्रार्थना सभाओं में जाने का सिलसिला बीते अप्रैल से चल रहा है। हालांकि उन्होंने धर्म बदलने से इनकार किया लेकिन लालच दिए जाने का आरोप जरूर लगा रही हैं।

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उनका कहना है कि इलाज और बच्चों की पढ़ाई और मकान दिलाने के वादे पर उन्होंने प्रार्थना में जाना शुरू किया। इसे धर्मपरिवर्तन कराने के लिए लालच देना बताते हुए हिंदूवादी संगठनों के लोग मुकदमा दर्ज कराने थान पहुंचे लेकिन पुलिस ने तहरीर देने वाली महिला और उसके पति का बयान दर्ज कर लिया। रात साढ़े दस बजे सबको लौटाते हुए कहा कि तहरीर पर जांच के बाद ही रिपोर्ट दर्ज करने का फैसला होगा।
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दो दिन पहले भी गांव आए कुछ लोगों ने ईसाई धर्म से संबंधित पुस्तकें बांटीं। तब गांव में महिलाओं के उनसे  जुड़ने की बात खुली। ग्रामीणों के जरिए यह बात हिंदूवादी संगठनों और मीडिया तक पहुंची।

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धर्म बदलने के लिए दिया लालच

Pother over Hindus being converted to Christians in Agra

वेदनगर कबाड़ बस्ती मामले की हवा में इस मामले ने रविवार को तूल तब पकड़ा जब ये लोग गांव पहुंचे और पूछताछ शुरू की। बता दें, गढ़ी संपत बघेल, ठाकुर और जाटव समाज के लोगों की मिश्रित आबादी वाला गांव है।

पता चला, बनी सिंह की पत्नी रामवती का मायका टूंडला के पीपल चौकी, गढ़ी तुलसी में है। टूंडला टोल के पास बने दलित अवतार नाम से बने केंद्र के सभागार में प्रार्थना सभा आयोजित होती है। ग्रामीण महिलाएं इसे ही चर्च बता रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि  नियमित ‘चर्च’ जाने वाला रामवती का भाई ही उसे पहली बार करीब दस माह पूर्व वहां ले गया। उसने रामवती को बताया कि पिंगारी या प्रार्थना में भाग लेने से बीमारियां दूर हो जाती हैं। तब से रामवती महीने में दो-तीन बार वहां जाने लगी। बाद में वह गांव की अन्य महिलाओं को भी साथ ले गई। गांव के कई घरों में बाइबिल भी आ गया। महिलाएं पढ़तीं और बच्चों को भी पढ़ातीं। कुछ परिवारों में तो पुरुषों को हवा भी न लगी कि उनकी पत्नियां चर्च जाती हैं। उन्हें बताया जाता कि वे टूंडला सत्संग में जाती हैं।

रामवती के पति बनी सिंह ने बताया कि वह भगवान शिव का भक्त है। मंदिर जाता है। उसे पत्नी के चर्च जाने की जानकारी हुई तो उसने विरोध किया। तब पत्नी ने बताया उसके चर्च जाने से बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला मिलेगा। वे लोग मकान भी दिलाएंगे तो वह खामोश हो गया। इस तरह गांव की भूदेवी पत्नी वीरेंद्र सिंह बघेल, श्रीमती पत्नी रामप्रकाश, कृष्णा देवी पत्नी हाकिम सिंह, सुनीता देवी पत्नी निहाल सिंह, राकेश कुमारी पत्नी राजवीर सिंह, रामदुलारी पत्नी ज्वाला सिंह, मंजू पत्नी वीरेंद्र सिंह, उर्मिला देवी पत्नी शिव कुमार शर्मा, कस्तूरी देवी, चंद्रवती समेत 20 महिलाओं ने ईसाई धर्म से अपनी आस्था जोड़ ली।

महिलाओं से ईसाई धर्म अपनाने की बाबत पूछताछ हुई तो उनका कहना था कि वे तो पिंगारी में चर्च जाती हैं। धर्म बदलने की बात से सबने इनकार किया लेकिन कुछ ने आरोप लगाया कि उन्हें बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला और मकान दिलाने का लालच दिया गया था। हालांकि अब तक यह वादा पूरा नहीं हुआ है। इसके बाद इन महिलाओं को लेकर हिंदूवादी संगठनों के लोग थाने पहुंच गए। उनका आरोप था कि इन्हें धर्म बदलने का लालच दिया गया। इसलिए इसकी रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। इस बीच मामले की जांच एसडीएम एत्मादपुर के एसडीएम व सीओ और सीओ एलआईयू गांव भी गए।

टूंडला कैथोलिक चर्च के पादरी फादर एन्ड्रूज कोरिया का कहना है कि चर्च अथवा यहां के ईसाइयों द्वारा धर्मपरिवर्तन कराने की कोशिश कभी नहीं की गई। हम विद्यालय एवं चर्च के कार्यक्रम जरूर करते हैं। अपने धर्म के मुताबिक पूजा-पाठ करते हैं लेकिन कौन, कहां और क्या कर रहा है, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं। हां, अगर कोई हमारे चर्च का कोई नाम ले रहा है, तो वह गलत है।

गांव में हिंदूवादियों का डेरा

Pother over Hindus being converted to Christians in Agra

गढ़ी संपत में कथित धर्मांतरण का हल्ला मचते ही कुछ ही देर में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद सहित कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने गांव में डेरा डाल दिया। भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंचे। हिंदूवादियों आरोप है कि ईसाई प्रचारकों ने महिलाओं को लालच देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित रहे थे।

रविवार दोपहर करीब एक बजे गढ़ी संपत में हिंदुओं के ईसाई धर्म अपनाने की खबर फैली। शोर करीब 30 हिंदू परिवारों के धर्मपरिवर्तन का था। आनन-फानन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता गांव पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों से बात कर हकीकत जानने का प्रयास किया। इन नेताओं ने बताया कि महिलाओं को एक-एक लाख रुपये देने, पतियों को नौकरी, बच्चों को ईसाई मिशनरी स्कूलों में दाखिला और लाइलाज बीमारियों से छुटकारा दिलाने का लालच दिया गया था। हिंदूवादी ग्रामीणों को लेकर इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने एत्मादुर थाने पहुंचे जहां पुलिस से उनकी झड़प भी हुई।

दूर से जानकारी लेते रहे संघ-भाजपा के नेता
गढ़ी संपत मामले से संघ और भाजपा के पदाधिकारी सीधे तौर पर तो नहीं जुड़े लेकिन पल-पल की खबर लेते रहे। भाजपा के बृज क्षेत्र कार्यालय पर वरिष्ठ पदाधिकारियों का जमावड़ा रहा। वहां से कुछ पदाधिकारियों को गांव भेजा गया। संघ कार्यकर्ता भी गांव में पहुंच गए लेकिन मीडिया के सामने खुलकर आने से परहेज किया।

गांव में हुआ मीडियाकर्मियों का जमावड़ा

वेदनगर प्रकरण अभी समाप्त नहीं हुआ है उस पर गढ़ी संपत की खबर मिलते ही मीडिया की सक्रियता बढ़ गई। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोग गांव में पहुंच गए। गांव में अचानक बढ़ी भीड़ से मेले सा दृश्य था। देर रात तक एत्मादपुर थाने पर भी लोगों की भीड़ लगी रही।

गांव का युवक महिलाओं के बीच करता था प्रवचन

Pother over Hindus being converted to Christians in Agra

गांव गढ़ी संपत के कथित धर्मांतरण मसले में गांव के ही एक युवक अहम भूमिका है। बताते हैं वह कई वर्षों से टूंडला चर्चा से जुड़ा है। वह गांव में महिलाओं के बीच ईसाई धर्म का प्रचार करता था।

हरीशंकर बताता है कि उसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया है। नाम क्यों नहीं बदला के सवाल का उसने जवाब नहीं दिया लेकिन कहा कि उसकी ईसाई धर्म में आस्था है। इसी के चलते वह इसका प्रचार करता है। ग्रामीणों के मुताबिक जब गांव के पुरुष अपने खेतों या काम पर चले जाते थे तब हरीशंकर महिलाओं को जुटाकर अपनी बात रखता। महिलाएं प्रचार सामग्री लेने के बाद अनपढ़ होने हवाला देतीं तो वह कहता कि किताबें बच्चों को पढ़ने दें और उन्हें ईसाई धर्म के बारे में बताएं। हो सके तो बच्चों को भी प्रार्थना सभा लेकर जाएं। गांव के पुरुष न तो उसकी बातों पर ध्यान देते हैं और न ही कभी प्रार्थना सभाओं में गए।

दुआ से असाध्य रोग भी ठीक होने का दावा
चर्च में किसी व्यक्ति के किसी असाध्य रोग से पीड़ित होने या फिर बीमार होने पर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित कर उसके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कराई जाती है। गांव की कुछ महिलाओं का दावा है कि दुआ से ही उनका कमर दर्द दूर हुआ। एक महिला का बच्चा बीमार रहता था। उसका दावा है कि दुआ कराने के बाद से वह ठीक है। ज्यादातर महिलाएं अशिक्षित हैं। इन्हें लगा कि उनकी छोटी से बीमारी पर भी चर्च के लोग दुआ कराते हैं। इससे उनकी आस्था बढ़ी। रामप्रकाश की पत्नी श्रीमती ने बताया कि पादरी ने उनसे कहा था कि बाइबिल पढ़ने से भी बीमारियां दूर होती हैं।

नौ माह पहले आए थे दिल्ली से पादरी

गांव के लोगों ने बताया कि इसी साल अप्रैल में दिल्ली से ईसाई धर्म के दो प्रचारक गांव आए थे। उन्होंने महिलाओं से बातचीत की। साहित्य भी बांटा। कहा था कि सामूहिक प्रार्थना में गांव की महिलाएं चर्च में जाएं, उन्हें इसका बड़ा फायदा होगा।

पुलिस का सूचना तंत्र यहां भी फेल

वेदनगर कबाड बस्ती में धर्मांतरण मामले की तरह गढ़ी संपत में भी पुलिस के सूचना तंत्र की नाकामी सामने आई। इस गांव में भोली भाली ग्रामीण महिलाओं को करीब 10 माह से ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन दिए जा रहे थे। मसले के संवेदनशील होने के बावजूद पुलिस को इसकी हवा नहीं लगी। पुलिस ने गांव-गांव में ग्राम चौकीदार बनाए हैं। बीट के सिपाही और हल्का इंचार्ज को भी गांव की खबर होनी चाहिए। वेद नगर मामले में पुलिस की कम छीछालेदर नहीं हुई थी। अब इस नए मामले में प्रलोभन देकर धर्मांतरण की कोशिश का आरोप है। पुलिस को इसकी भनक न थी।

रिपोर्ट पर सियासत में हिंदूवाद जाति से हारा

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गढ़ी संपत प्रकरण में रिपोर्ट लिखाने पर जंग में हिंदूवाद पर जाति भारी पड़ी। रिपोर्ट लिखाने आई महिला के तेवर नरम होते ही पुलिस उन पर कड़क हो गई। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं को थाने से बिना रिपोर्ट लिखाए लौटना पड़ा। हुआ यूं, रामवती की ओर से दी गई तहरीर में स्पष्ट रूप से लिखा था कि लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया गया। हिंदूवादी चाहते थे कि मुकदमा दर्ज किया जाए, लेकिन पुलिस इस बात पर अड़ी थी कि गांव में धर्मांतरण हुआ ही नहीं है। इसी पर पुलिस अफसरों से झड़प भी हुई। बाद में रामवती के रिश्तेदार और सजातीय नेता थाने आ गए। उनसे और पुलिस अफसरों से अलग-अलग बातचीत के बाद रामवती और उनके पति में भरी गई हिंदूवाद हवा कुछ कम हुई। हिंदूवादी इसबात पर अड़े थे कि रामवती व उनके पति को गांव छोड़ने जाएंगे क्योंकि वे उन्हें लाए थे। पुलिस ने साफ मना कर दिया। कहा कि हम खुद उन्हें पहुंचाएंगे। तब करीब साढ़े दस बजे कार्यकर्ता थाने से हटे।

नगला तुलसी में प्रार्थना सभाओं का विरोध
एत्मादपुर के गांव गढ़ी संपत के कारण टूंडला के गांव नगला तुलसी अचानक रविवार को चर्चा का केंद्र बन गया। लेकिन अब यहां भी कुछ दिनों से प्रचार की गतिविधियां सीमित हुई हैं। ऐसा गांववालों द्वारा ही इन गतिविधियों का विरोध करने पर हुआ। ईसाई धर्म प्रचारकों पर धर्मांतरण के लिए लोगों को प्रेरित करने के आरोप यहां पहले भी लगते रहे हैं। बीमारियों से निजात दिलाने का दावा सबसे बड़ा हथकंडा बताया जाता है। हालांकि ऐसे विश्वासियों की भी कमी नहीं जो दावा करते हैं कि उनकी असाध्य बीमारियां भी प्रार्थना-दुआ से दूर हुईं।

गांव नगला तुलसी में पहले बाहर से प्रचारक आते थे। ग्रामीण जुटाए जाते। आगरा समेत अन्य स्थानों से भी लोग आते। फिर प्रार्थना-प्रवचन होते। गांव के गैर ईसाई लोग धीरे-धीरे इसका विरोध करने लगे। नतीजा यह हुआ कि जो प्रार्थना सभाएं पहले खुले में आयोजित होती थीं वह स्थानीय अनुयायियों के घरों में होने लगीं। बाहरी प्रचारकों का आना भी कम हुआ। यहां आने वाले पादरी को भी आए दो हफ्ते हो चुके हैं। प्राय: रविवार को ये लोग प्रार्थना में शामिल होने चर्च जाते हैं। इसी चर्चा के बीच टोल प्लाजा के पास सामुदायिक केंद्र की तर्ज पर बना ‘दलित अवतार’ का नाम भी सामने आया। गढ़ी संपत की महिलाएं यहीं प्रार्थना सभा में हिस्सा लेतीं। वह इसे भी चर्च ही कहती हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब ईसाई मिशनरी के लोगों पर गांवों में पहुंचकर इलाज करते हुए ग्रामीणों को धर्मांतरण के लिए तरह-तरह के लालच देने के भी आरोप लगे। एक वर्ष में तीन-तीन माह के अंतराल पर यमुना तलहटी के गांव रसूलाबाद, बालमपुर, छाहरी, बजहेरा आदि गांवों में प्रचारक प्रार्थना और चंगाई सभाओं के आयोजन करते रहे हैं।

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