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IAS-IPS की तर्ज पर शुरू होगी इंडियन मैरीटाइम सर्विस
विनोद अग्निहोत्री/दिल्ली
Updated Sat, 19 Oct 2013 12:09 AM IST
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देश भर में समुद्र और नदियों के किनारों पर बसने वाले मछुआरों और नौका चालन से रोजी रोटी कमाने वाले लाखों परिवारों के युवाओं के लिए अब जहाजरानी उद्योग में रोजगार का दरवाजा खोलने की तैयारी केंद्र सरकार कर रही है।
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अन्य केंद्रीय सेवाओं की तरह जल्दी ही भारतीय सामुद्रिक सेवा (इंडियन मैरीटाइम सर्विस) शुरु करने के केंद्रीय जहाजरानी बोर्ड के प्रस्ताव को सरकार ने गंभीरता से लिया है।
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इसे कांग्रेस का एक बड़ा सियासी दांव भी माना जा सकता है जिसके जरिए पार्टी लोकसभा चुनावों में देश के तीन ओर फैले समुद्री तट के मछुआरों और नाव चलाकर जीविका कमाने वाली एक बड़ी आबादी को संदेश देना चाहती है।
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इसकी पहल राष्ट्रीय जहाजरानी (शिपिंग) बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य संदीप चंद्रा जो कांग्रेस के युवा नेता हैं, ने की है और जहाजरानी मंत्री जी.के. वासन भी इसके लिए राजी हैं।
केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय जहाजरानी बोर्ड (नेशनल शिपिंग बोर्ड) जो जहाजरानी क्षेत्र की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था है, के सदस्य संजीव चंद्रा के मुताबिक बोर्ड की पिछले दिनों हुई बैठक में यह प्रस्ताव रखा
गया कि जिस तरह से अन्य क्षेत्रों की केंद्रीय सेवाएं हैं, मसलन भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा, भारतीय इंजीनियरिंग सेवा आदि उसी तर्ज पर भारतीय सामुद्रिक सेवा (इंडियन मैरिटाइम सर्विस) का गठन किया जाए।
यह प्रस्ताव चंद्रा ने बैठक में रखा। चंद्रा के मुताबिक बोर्ड की बैठक में न सिर्फ सदस्यों ने बल्कि बैठक में शामिल नौसेना और तटरक्षक दल केप्रतिनिधियों ने इसका समर्थन किया।
चंद्रा के मुताबिक बोर्ड के प्रस्ताव को मंजूर करते हुए जहाजरानी मंत्रालय ने पूर्व जहाजरानी सचिव डी.टी.जोसेफ की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी है। यह कमेटी इसके सभी जरूरी पहलुओं का अध्ययन करके तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को देगी।
मंत्रालय अपनी संस्तुति के साथ कार्मिक मंत्रालय को प्रस्तावभेजेगा। कार्मिक मंत्रालय केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इस आशय का विधेयक संसद में पेश करेगा जिसे पारित करके इस नई केंद्रीय सामुद्रिक सेवा का गठन किया जाएगा। चंद्रा का कहना है कि इस प्रस्ताव से जहाजरानी मंत्री जी.के. वासन के साथ सरकार और कांग्रेस नेतृत्व सहमत हैं।
चंद्रा कहते हैं कि भारत की विशाल समुद्री सीमा से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार होता है। लेकिन हमारे बंदरगाहों, जहाजों और सामुद्रिक व्यापार से जुड़े दूसरे कामों के लिए कोई नियमित कैडर नहीं है।
मर्चेंन्ट नेवी के इंजीनियर निजी व्यापारिक जलयानों के लिए नियुक्त होते हैं, जबकि जलपत्तनों, बंदरगाहों आदि में काम करने वाले कर्मचारी स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों के जरिए दिहाड़ी मजूदरी पर काम पर लगाए जाते हैं। उनके प्रशिक्षण, सत्यापन आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए भी चिंताजनक है।
मुंबई पर आतंकवादी हमले के बाद सरकार का ध्यान इस ओर भी गया है। इसलिए बोर्ड ने सामुद्रिक सेवा शुरु करने का प्रस्ताव भेजा है जिसमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी स्तर तक विभिन्न श्रेणियों में अखिल भारतीय स्तर पर चयन किया जाएगा और इसमें मछुआरों और नाविक पृष्ठभूमि के युवकों को वरीयता दी जाएगी।