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फिर बदनाम हुई विधानसभा, पोर्न देखते हुए पकड़े सरकारी बाबू

Thu, 22 Aug 2013 12:26 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 22 Aug 2013 12:26 PM IST
government officials watch porn videos in office

कर्नाटक विधानसभा के कर्मचारियों का ध्येय वाक्य है, 'सरकार का काम, भगवान का काम होता है', क्योंकि सरकार का काम यानी जनता के लिए काम करना। लेकिन इन कर्मचारियों के लिए इस काम का मतलब पोर्न वीडियो देखना है।



सीबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कर्मचारी खासतौर पर विधानसभा में काम करने वाले कर्मचारी ऑफिस के समय पोर्न वेबसाइट देखते हैं।

टीओआई के मुताबिक सीबीआई ने आपराधिक जांच विभाग(सीआईडी) को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें बताया गया है कि प्रशासनिक अधिकारी अपने ऑफिस के समय में पॉर्न वीडियो देखते हैं।


सीबीआई को यह जानकारी सरकारी दफ्तरों में इंटरनेट गतिविधियों की निगरानी के दौरान मिली है। सीआईडी ने भी सीबीआई से फाइल मिलने की पुष्टि की है लेकिन आगे क्या किया जाएगा इस पर चुप्पी साध रखी है।
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चाइल्ड पोर्न भी देखने की संभावना
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जांच एजेंसी ने पाया कि राज्य में सरकारी कर्मचारी विशेषतौर पर विधानसभा में काम करने वाले पोर्नोग्राफी देखने के लिए kar.nic.in का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं। साइबर विशेषज्ञों की आतंकवाद विरोधी निगरानी के दौरान यह जानकारी मिली है। इस दौरान विधानसभा के कर्मचारी पोर्न वेबसाइट देखते पाए गए हैं।

अधिकारी के अनुसार संभावना है कि राज्य सरकार के कर्मचारी चाइल्ड पोर्न भी देखते हों। यह प्रवृत्ति देश में कहीं और भी हो सकती है।

सीआईडी ने नहीं की कोई कार्रवाई
सीबीआई अफसर ने कहा कि राज्य सरकार के सभी सर्वर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सर्वर से जुड़े हुए हैं। सरकार के सभी विभाग उनके रडार पर हैं।

उन्होंने बताया कि सीबीआई पोर्न सामग्री के संबंध में सीआईडी के साइबर क्राइम सेल को अवगत कराती रही है लेकिन उनकी जानकारी में अभी तक कोई सुधार नहीं किया गया है।

एक खुफिया अधिकारी के मुताबिक आई-टी काननू के प्रावधानों के अनुसार पब्लिक या ऑफिशियल सर्वर से पोर्न सामग्री देखना अनुशासनहीनता के अंतर्गत आता है और इसके लिए सजा भी मिल सकती है।


ई-गर्वनेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी एस रविंद्रन बताते हैं कि ऑफिशियल सर्वर के दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने नीतियां बनाई हैं लेकिन वे सभी सरकारी कर्मचारियों से जिम्मेदार होने की अपेक्षा भी करते हैं। वे सभी आपत्तिजनक सामग्री को फिल्टर और फायरवॉल के जरिए ब्लॉक करने की कोशिश करेंगे।


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