फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   God and religious books are not belongs to anyone: Supreme court

भगवान और धार्मिक ग्रंथ किसी की बपौती नहीं: SC

Thu, 26 Nov 2015 06:06 AM IST
Updated Thu, 26 Nov 2015 06:06 AM IST
विज्ञापन
God and religious books are not belongs to anyone: Supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भगवान और धर्मिक ग्रंथ किसी व्यक्ति या समुदाय की ...बपौती... नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अपने उत्पाद या सामान बेचने के लिए कोई विक्रेता भगवान या उनके धार्मिक किताबों केनाम या संकेत का इस्तेमाल निजी ब्रांड केतौर पर नहीं कर सकता।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने कहा है कि कोई भी विक्रेता भगवान का नाम या धार्मिक किताबों के नाम पर ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड नहीं करा सकता क्योंकि इस पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। यह लोगों की संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है। पीठ ने कहा कि रामायण, गुरु ग्रंथ साहिब, बाइबल, कुरान  आदि धार्मिंक किताब हैं। क्या कोई अपने सामानों की बिक्री के लिए किसी धार्मिक किताबों के नाम को ट्रेडमार्क बना सकता है। पीठ ने कहा कि ऐसा कोई नहीं कर सकता और न ही इसकी इजाजत दी जा सकती है।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि कानून के तहत किसी को अपने सामान या उत्पादों को बेचने के लिए भगवान के नाम का सहारा लेने की इजाजत नहीं है। अगरबत्ती और परफ्यूम बनाने वाली पटना की एक कंपनी ने रामायण को ट्रेडमार्क बनाने की इजाजत मांगी थी। लाल बाबू प्रियदर्शी ने बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड के फैसले को चुनौती दी थी। बोर्ड ने अमृतपाल सिंह नामक व्यक्ति के पक्ष में फैसला दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

'रामायण' का नहीं हो सकता पंजीकरण

God and religious books are not belongs to anyone: Supreme court

अमृतपाल का कहना था कि रामायण को ट्रेडमार्क के तौर पर पंजीकृत नहीं किया जा सकता क्योंकि धार्मिक किताब का नाम पर किसी भी व्यक्ति का एकाधिकार नहीं हो सकता। हालांकि प्रियदर्शी का कहना है कि कानून धार्मिक किताब केनाम को ट्रेडमार्क बनाने से नहीं रोकता।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि रामायण महर्षि वाल्मीकि ने लिखी थी और इसे हिन्दुओं का धर्मग्रंथ समझा जाता है। लिहाजा किसी भी व्यक्ति को रामायण नाम को ट्रेडमार्क बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अधिनियम इसकी इजाजत नहीं देता।
पीठ ने पाया कि प्रियदर्शी के उत्पादों पर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की तस्वीर है।

साफ है कि वह भगवान के नाम पर वह फायदा उठा रहा था। लेकिन इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। पीठ ने संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट में कहा गया था कि भगवान और पूजा स्थलों के नाम पर ट्रेडमार्क पंजीकृत नहीं किया जा सकता। हालांकि पीठ ने कहा कि अगर किसी को रामायण शब्द का इस्तेमाल करना हो तो वह इसके आगे या पीछे कोई शब्द लगा ले।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed