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राजभवन में बैठेंगे BJP नेता, बीएल जोशी का इस्तीफा

Tue, 17 Jun 2014 08:55 PM IST
Updated Tue, 17 Jun 2014 08:55 PM IST
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Furore on governor resignation after central government order

नरेंद्र मोदी सरकार ने यूपीए शासन में नियुक्त राज्यपालों को हटाने की कसरत शुरू कर दी है। अब अगले कुछ दिनों में विभिन्न राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति होने लगेगी।

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इसी के चलते उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने मंगलवार को अपना इस्तीफा भेज दिया, जबकि केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित और कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज समेत आधा दर्जन से ज्यादा राज्यपालों पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा दिया गया है।
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हालांकि असम के राज्यपाल जेबी पटनायक ने इस्तीफा देने से दो टूक इनकार कर दिया है और शीला भी हटने के मूड में नहीं है। मगर नई सरकार ने इन्हें हटाने का बना लिया है।
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भाजपा नेताओं को बैठाने की तैयारी

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दूसरी तरफ मोदी सरकार की ओर से भाजपा के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह, कैलाश जोशी, सीपी ठाकुर, वीके मल्होत्रा, केसरीनाथ त्रिपाठी और लालजी टंडन आदि नेताओं को जल्दी ही राजनिवास भेजा जाना तय है।

केंद्र सरकार राजनिवासों में जमे खांटी कांग्रेसी नेताओं को सबसे पहले बाहर कर रास्ता दिखाना चाहती है क्योंकि 2004 में  यूपीए के सत्ता में आने पर एनडीए शासन में नियुक्त कई राज्यपालों को तब की मनमोहन सरकार ने यह कहकर हटा दिया था कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं।

हालांकि मोदी सरकार के लिए अब ऐसा कर पाना आसान नहीं दिख रहा है क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि बिना कारण बताए राज्यपाल को नहीं हटाया जा सकता है। माना जा रहा है कि शीला और पटनायक इसी फैसले को ढाल बनाकर मोदी सरकार की मुश्किल बढ़ाना चाहते हैं।

शीला की भी व‌िदाई तय

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बहरहाल, अब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल जोशी ने तो इस्तीफा दे दिया है, हालांकि उनका कार्यकाल अगले महीने खत्म होने जा रहा था। जबकि शीला और पटनायक के अलावा गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल, पश्चिम बंगाल के राज्यनाल एम के नारायणन, महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायणन और राजस्थान की राज्यपाल मार्गरेट अल्वा आदि की विदाई तय है।

कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज का कार्यकाल भी इसी महीने के आखिर में खत्म हो रहा है। दिल्ली में भी मोदी सरकार जल्दी ही अपना उप राज्यपाल तैनात करेगी। इसलिए नजीब जंग की विदाई या तबादला हो सकता है।

मोदी सरकार ने यूपीए सरकार में नियुक्त कई राज्यपालों को पहले ही संकेत दे दिया था कि उन्हें राजनैतिक परिपाटी के अनुसार अपने पदों से इस्तीफे दे देना चाहिए, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार आने के लगभग एक माह बीत जाने पर भी किसी ने भी इस्तीफा नहीं दिया।

गृहस‌च‌िव ने फोन कर द‌िए आदेश

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बताया जाता है कि केन्द्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने इन राज्यपालों को फोन कर इस्तीफे देने के नई सरकार के इरादों को जाहिर कर दिया था।
 
उधर केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित इस्तीफा देने के मूड में नहीं है। वैसे दिल्ली प्रदेश भाजपा का एक खेमा भी चाहता है कि विधानसभा चुनाव तक शीला को केरल में ही रखा जाए। क्योंकि उनके दिल्ली लौटने ही चुनाव में वे भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं।

इधर, केंद्र ने खाटी कांग्रेसी राज्यपालों को साफ संकेत दे दिया है कि उन्हें पद छोडऩा होगा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि यदि वे उनकी(राज्यपालों) की जगह होते तो पद से हट गए होते।

मुलाकातों का दौर जारी

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इस बीच राजस्थान की राज्यपाल मार्गरेट अल्वा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया है। राज्यपाल के रूप में अल्वा का पांच साल का कार्यकाल अगस्त में पूरा हो रहा है।

दूसरी ओर कर्नाटक के राज्यपाल एच आर भारद्वाज और असम के राज्यपाल जे बी पटनायक ने मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भेंट की।

राज्यपालों का कार्यकाल खत्म होने के करीब

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माना जा रहा है कि कम से कम छह राज्यों के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे सकते हैं। बताया जाता है कि केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित से भी पद छोडऩे को कहा है जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया है।

कई राज्यपालों का कार्यकाल अगले महीने से लेकर जनवरी 2015 के बीच समाप्त हो रहा है।

इनमें कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज, गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल, हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा, पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल, महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायण और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन शामिल हैं।

भाजपा के दिग्गज रेस में

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भाजपा अपने कई वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल नियुक्त करने पर विचार कर रही है। राज्यपाल पद के लिए जिन नेताओं के नाम चल रहे हैं उनमें मुरली मनोहर जोशी, विजय कुमार मल्होत्रा, भुवन चंद्र खंडूरी, यशवंत सिन्हा, कल्याण सिंह और शांता कुमार शामिल हैं।

2004 में यूपीए सरकार ने सत्ता संभालने के बाद राज्यपालों को बदलने का फैसला किया था तो विवाद उठ खड़ा हुआ था। बाद में यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था। न्यायालय ने 2010 में व्यवस्था दी थी कि राज्यपाल केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं और उन्हें मनमाने ढंग से हटाया नहीं जा सकता।

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