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मुलायम, पवार के तेवर से सहमी मनमोहन सरकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jun 2013 12:25 AM IST
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खाद्य सुरक्षा को अध्यादेश के जरिए लागू करने की अपनी तैयारियों से सरकार ने पर्दा उठा दिया है।
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सरकार ने दो टूक कह दिया है कि बिल को लागू करने के लिए उसके पास अब कोई और रास्ता नहीं है। कैबिनेट गुरुवार को अध्यादेश पर मुहर लगा सकती है।
मगर यूपीए के सबसे अहम सहयोगी कृषि मंत्री शरद पवार के अध्यादेश को लेकर जाहिर ऐतराज अभी भी बने हुए हैं।
सरकार के मैनेजर उन्हें मनाने में जुटे हैं, तो मुलायम सिंह यादव ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। उन्होंने अब खुद बिल का संसद में विरोध करने का ऐलान कर दिया है।
खाद्य सुरक्षा के विधेयक को अध्यादेश के जरिए अब सरकार और कांग्रेस एकजुट होकर आगे बढ़ने की तैयारी में है। इस मुहिम में वह किसी की सुनने को तैयार नहीं है बल्कि वह अपनी बात पर राजी करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
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संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने कहा कि संसद सत्र में मौका नहीं मिलने के बाद सरकार के पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है।
वहीं शरद पवार खुल कर कह चुके है कि वह चाहते है कि संसद में बिल पर चर्चा होने के बाद बिल पास हो। ऐसे मुद्दे पर अध्यादेश रास्ता नहीं हो सकता। मगर सरकार उनके ऐतराज को दरकिनार कर उन्हें अपनी सियासी मजबूरियां समझाने में जुट गई है।
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सूत्रों के मुताबिक खाद्य मंत्री पी सी थॉमस उनसे कई बार बात कर चुके हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को उम्मीद है कि वह मान जाएंगे।
बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की अध्यादेश पर मुहर लगाने की पूरी तैयारी कर ली है। मगर बुधवार को मुलायम सिंह यादव ने बिल का विरोध करने का बिगुल बजा दिया है।
मुलायम का कहना है कि यह किसान विरोधी बिल है। इसे पार्टी संसद में पारित नहीं होने देगी। मुलायम सिंह ने कहा कि बिल के आने से किसान और कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा। यह सरकार गरीबी नहीं बल्कि गरीबों को ही खत्म कर रही है।
दूसरी तरफ सरकार के मैनेजर उन्हें भी मनाने की कोशिश में है। मगर इससे पहले पवार को मनाना सरकार और कांग्रेस पहली प्राथमिकता मान रही है।