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जब मोदी के गढ़ में ही भीड़ ने उन्हें कहा फेंकू
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 30 Oct 2013 02:23 PM IST
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नरेंद्र मोदी के साथ शायद यह पहला मौका होगा जब गुजरात की धरती में ही उनके सामने भीड़ उन्हें फेंकू-फेंकू कह कर ताने मार रही थी। मंगलवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में केंद्र सरकार के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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मोदी सरदार पटेल ट्रस्ट के राष्ट्रीय संग्रहालय के उद्घाटन समारोह के दौरान बोल रहे थे। मोदी ने सरदार पटेल के बहाने जवाहर लाल नेहरू और गांधी परिवार पर तंज कसते हुए कहा कि काश! जवाहर लाल नेहरू की जगह सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर कुछ और ही होती। मोदी ने आगे कहा कि सरदार पटेल ने 1919 में महिलाओं के लिये आरक्षण लाने की बात कहकर अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया था।
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इतिहास की जानकारी कम होने का आरोप
इसके बाद मंच पर केंद्र सरकार के मंत्री और कांग्रेस सांसद दिनशा पटेल आए। सरदार पटेल ट्रस्ट के अध्यक्ष दिनशा पटेल ने मोदी के इतिहास ज्ञान पर सवाल उठाया और कहा कि मोदी जी ने कहा कि सरदार पटेल ने 1919 में महिला आरक्षण की बात कही थी लेकिन मैं उन्हें सुधारना चाहता हूं, वो साल 1919 ना होकर 1926 था।
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दिनशा पटेल का इतना कहना था कि समारोह में मौजूद भीड़ मंच पर बैठे नरेंद्र मोदी की ओर इशारा कर फेंकू-फेंकू कहने लगी। इस दौरान मनमोहन सिंह जिंदाबाद और कांग्रेस जिंदाबाद के नारे भी लगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री को अपना भाषण देना था। प्रधानमंत्री ने इस नारेबाजी को नजरअंदाज करते हुए अपना भाषण दिया। मोदी पर मनमोहन सिंह ने भी तीखे हमले बोले। उन्होंने इस मौके पर साफ कर दिया कि सरदार पटेल पक्के कांग्रेसी थे। पटेल का नजरिया पूरी तरह से सेकुलर था। पीएम के इस बात के पीछे इशारा साफ था कि आरएसएस और नरेंद्र मोदी, कांग्रेसी सरदार पटेल की विरासत हथियाने की कोशिश न करें।
नरेंद्र मोदी के लिए मंगलवार को यह दूसरा मौका था जब इतिहास ज्ञान को लेकर उनपर गंभीर सवाल उठे। इससे पहले राजगीर में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी पर हुंकार रैली के दौरान बिहार का इतिहास बदलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पाकिस्तान के तक्षशिला विश्वविद्यालय को बिहार का बता डाला। सिकंदर को गंगा नदी तक पहुंचा दिया जबकि वह सतलुज नदी तक भी पहुंच नहीं सका था। चंद्रगुप्त मौर्य को गुप्त वंश का बता दिया, जबकि वह मौर्य थे।