मोबाइल फोन व टावर से निकलने वाले तरंग सुरक्षित : विशेषज्ञ
मोबाइल टावर विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल फोन व टावरों से निकलने वाले तरंग सुरक्षित है क्योंकि वे कम ऊर्जा के होते हैं। उनका कहना है कि भले ही सेल और मोबाइल टावर दोनों ही रेडिएशन छोड़ते हैं, लेकिन उत्सर्जन का स्तर नियमों के दायरे में हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक रेडिएशन ऊर्जा का संचरण है जो दो प्रकार का होता है-आयनित और गैर आयनित। एक्स-रे या गामा किरणों जैसे आयनित रेडिएशन डीएनए में बदलाव कर सकते हैं और खतरनाक साबित हो सकते हैं। हालांकि मोबाइल टावरों द्वारा उत्सर्जित गैर आयनित रेडिएशन में कम ऊर्जा है जो सिर्फ गर्मी पैदा करती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल टावरों और फोनों से रेडिएशन का उत्सर्जन होता है क्योंकि वॉयस एवं डाटा टेलीफोन अदृश्य रेडियो तरंगों पर काम करती है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड स्पेक्ट्रम में रेडियो तरंगों का ही एक ही हिस्सा होता है।
मोबाइल फोन ज्यादा रेडिएशन का उत्सर्जन करते हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि सभी इलेक्ट्रिकल उत्पाद माइक्रोवेव ओवन, मिक्सर ग्राइंडर जैसे सभी इलेक्ट्रिकल उत्पाद रेडिएशन का उत्सर्जन करते हैं और मोबाइल टावरों की तुलना में मोबाइल फोन 1,000 गुना अधिक रेडिएशन का उत्सर्जन करते हैं।
भारत में मोबाइल फोन हैंडसेट को 1.6 किलोवॉट से अधिक रेडिएशन का उत्सर्जन करने की अनुमति नहीं है जो दुनिया के अन्य देशों में लागू नियमों के मुकाबले कहीं अधिक कड़े हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल और टावरों से निकलने वाला रेडिएशन सुरक्षित है क्योंकि वे कम ऊर्जा के होते हैं।
भारत में टावर से निकलने वाले रेडिएशन उत्सर्जन के मामले में सुरक्षा के मानक दुनिया के 90 फीसदी देशों के मुकाबले 10 गुना अधिक कड़े हैं। भारत में 90 करोड़ उपभोक्ताओं को सेवा देने के लिए 4,25,000 टावर हैं जबकि चीन में 1.29 अरब उपभोक्ताओं के लिए 13 लाख टावर हैं।