पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने पर हमले की तैयारी में था भारत!
अमेरिका विदेश विभाग ने बीते सप्ताह 1984-85 के गोपनीय दस्तावेजों को जारी किया है जो मुख्यतः पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रमों के संबंध में हैं।
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के विश्लेषण और इस्लामाबाद में अमेरिकी राजदूत के उस समय की बातचीत जब वो जनरल जिया उल हक को अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का पत्र देने गए थे, तब अमेरिका ने पाकिस्तान को इस बारे में आगाह किया था कि भारत कहुटा स्थित उसके परमाणु रिएक्टर पर हमला कर सकता है।
लेकिन ऐसी आशंका जताने वाले अमेरिकी अकेले नहीं थे। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के प्राध्यापक राजेश राजगोपालन ने बताया कि सेर्गेई राडचेंकेो और एर्टमी एम कैलीनोवस्की की पुस्तक 'द एंड ऑफ द कोल्ड वॉर एण्ड द थर्ड वर्ल्ड ' जो इस्टर्न ब्लॉक की ओर से जारी हुए दस्तावेजों पर आधारित थे, उससे पता चलता है कि सोवियत संघ ने हंगरी से जो जानकारी साझा की थी उसके मुताबिक भारत कहुटा पर हमला करने की तैयारी में था। (पाक के परमाणु रिएक्टर की सैटेलाइट फोटो 2007 में)
ये अफवाह थी?
राजगोपालन का कहना है कि हलांकि यह स्पष्ट नहीं कि कि क्या सोवियत संघ ने
वास्तव में भारतीय योजना की जानकारी अथवा यह कोई अफवाह थी।
इस तरह की
अफवाहें बड़े पैमाने पर थी और वाशिंगटन पोस्ट ने अपने अखबार के पहले पन्ने
पर स्टोरी भी 20 दिसम्बर 1982 को 'इंडिया सेड टू आई ऑन पाकिस्तान - ए
प्लान्ट' शीर्षक से प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि सेना के सलाहकारों
ने मार्च 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पाक के रिएक्टर पर हमले का
आदेश मांगा था लेकिन उन्होंने यह मांग खारिज कर दी थी।
वहीं के. सुब्रमण्यम
की किताब 'इण्डियाज न्यूक्लियर पॉलिसी 1964-98' में भी लिखा गया है कि
पश्चिमी मीडिया के द्वारा फैलाई गई अफवाह के फलस्वरुप राजीव गांधी को यह
सुझाव दिया गया था कि भारत, पाकिस्तान को इस बात का प्रस्ताव दे कि वे
दोनों कभी एक दूसरे पर परमाणु हमले नहीं करेंगे।
हालांकि यह प्रस्काव हकीकत
की जमीन वपर 1985 में उतरा और औपचारिक रुप से 1988 में स्वीकार किया गया।